इंदौर. सोया तेल व चने के वायदा कारोबार पर रोक के बाद कारोबारियों ने सोयाबीन, सरसों और ग्वार का रुख कर लिया है। अपेक्षा के विपरीत सोया तेल में मामूली तेजी दर्ज की गई और चने के दाम गिर गए। गुरुवार को देशभर में एनसीडीईएक्स में सोयाबीन के 40, सरसों के 60 और ग्वार के 50 प्रश सौदे ज्यादा हुए। उधर, अंतरराष्ट्रीय बाजार में आई तेजी और हापुड़ सरसों वायदा बाजार में उछाल के कारण सोया तेल के दाम में थोक में 20 पैसे प्रति लीटर व खेरची 50 पैसे प्रति लीटर की तेजी आई। चना जरूर 75 रु. क्विंटल गिरा।
तिलहनों में तेजी
विदेशी बाजारों में तेजी के कारण घरेलू सोयाबीन और सरसों वायदा ऊंचा रहा जिससे तिलहन बाजार में भी तेजी देखी गई। सोया तेल के वायदा कारोबार पर रोक लगने का खुले बाजार पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। अर्जेटीना में सोया किसानों की हड़ताल फिर शुरू होने से वैश्विक स्तर पर सोयाबीन की सप्लाय बढ़ सकती है। उधर, सोया तेल के वायदा कारोबार पर रोक से डब्बा (अन-ऑफिशियल) कामकाज जोर पकड़ने की आशंका है।
मार्केट को स्वागत को तैयार नहीं
जानकारों का कहना है..
* चना, सोया आयल, आलू और रबर में वायदा कारोबार पर रोक लगाने से कमोडिटी एक्सचेंजों का टर्नओवर 60 फीसदी तक घट सकता है।
* दैनिक आधार पर एनसीडेक्स, एनएमसीई में ही करीब 300-400 करोड़ का वायदा कारोबार प्रभावित होने का अनुमान है।
* वायदा कारोबार पर प्रतिबंध का सबसे ज्यादा प्रभाव इंदौर स्थित नेशनल बोर्ड आफ ट्रेड (एनबॉट) पर पड़ेगा, क्योंकि यहां सिर्फ सोया आयल में ही वायदा सौदे होते हैं।
-बी.सी. खटुआ, एफएमसी के चेयरमैन