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पुलिस के दागी अफसर हटाओ

चंडीगढ़पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार से कहा है कि दागी पुलिस अफसरों से महत्वपूर्ण पदों को छीन लेना राज्य के हित में होगा। हाईकोर्ट ने सरकार से कहा है कि वह ऐसे अफसरों को ऐसी जगह तैनात करे जो पब्लिक डिलिंग के न हों। हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार से सवाल किया है कि क्या राज्य विजिलेंस ब्यूरो प्रमुख सुमेध सैनी और उन जैसे अफसर, जिन पर अदालतों में मुकदमे चल रहे हैं और जिन्हें चार्जशीट भी किया जा चुका है, को महत्वपूर्ण पदों पर तैनात करना सही है। हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार से यह भी पूछा है कि वह पंजाब पुलिस एक्ट 2007, जिसे राज्य विधानसभा भी पारित कर चुकी है, को लागू करने के प्रति कितनी गंभीर है।

पंजाब सरकार से पूछा

हाईकोर्ट ने इस संबंध में राज्य के एडीजीपी स्तर के अधिकारी से 2 हफ्ते के भीतर एफिडेविट के माध्यम से यह जानकारी मुहैया कराने को कहा है। अपने आदेशों में जस्टिस महताब सिंह गिल ने मुख्य तौर पर राज्य के विजिलेंस प्रमुख सुमेध सिंह सैनी को निशाना बनाते हुए पंजाब सरकार से पूछा है कि क्या ऐसे अफसर जिसके खिलाफ दिल्ली की अदालत में आईपीसी के सेक्शन 341, 342, 364 और 120बी के तहत आरोप तय किए जा चुके हैं, को इतने महत्वपूर्ण और पब्लिक डिलिंग से जुड़े पद पर तैनात करना सही है? क्या सैनी पर पंजाब पुलिस एक्ट लागू होते हैं। क्योंकि इस एक्ट के सेक्शन 15 के अनुसार आईजी से लेकर एसएचओ रैंक के अफसर की किसी एक जगह पर तैनाती कम से कम एक साल और ज्यादा से ज्यादा 3 साल तक के लिए हो सकती है। अगर इन अफसरों में से किसी के खिलाफ आपराधिक मुकदमा चल रहा हो और उसे चार्जशीट किया जा चुका हो तो कंपीटेंट अथॉरिटी उस अफसर का तबादला कर सकती है। ऐसे में सैनी को विजिलेंस ब्यूरो जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण पद पर तैनात करना क्या सही है?

आईजी की याचिका पर सुनवाई

जस्टिस गिल ने यह आदेश राज्य के सस्पेंडेड आईजी राजिंद्र सिंह की याचिका पर सुनवाई के बाद दिए हैं। सुनवाई के दौरान राजिंद्र सिंह के वकील का कहना था कि पंजाब सरकार से पूछा जाए कि उसने राज्य में अहम पदों पर सैनी जैसे दागी अफसरों को क्यों तैनात किया हुआ है।

नवकिरन की नियुक्ति पंजाब में आतंकवाद को समाप्त करने में सुमेध सैनी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। हालांकि अपनी सख्त कार्यप्रणाली के कारण सैनी कई दफा विवादों में रहे हैं। हाईकोर्ट के एडवोकेट नवकिरन सिंह, जो मानवाधिकार के मामलों में सैनी के खिलाफ याचिकाएं दायर कर चुके हैं, को इस मामले में जस्टिस गिल ने एमीक्स क्युरई यानी कोर्ट के सहयोग के लिए नियुक्त किया है।





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