भोपाल. भास्कर की पहल रंग लाई है। शहर से सरोकार की अपनी प्रतिबद्घता को कायम रखते हुए हमने प्रयास किया था यह जानने का कि आखिर ढाई हजार करोड़ से ज्यादा पैसा खर्च कर शहर के विकास हेतु किए जा रहे कार्र्यो की वास्तविकता क्या है? परत दर परत सच्चई सामने आती गई और नगर निगम को मानना पड़ा कि विशेषज्ञों की निगरानी के बगैर ऐसे काम संभव नहीं हैं।
विशेषज्ञों के जिम्मे होगा जेएनएनयूआरएम, अधिकारियों ने माना कि 2153 करोड़ रुपए के इस प्रोजेक्ट के क्रियान्वयन के लिए नगर निगम के पास पर्याप्त अमला नहीं। नगर निगम ने जवाहरलाल नेहरू शहरी नवीनीकरण मिशन (जेएनएनयूआरएम) के काम विशेषज्ञों की निगरानी में करवाने का फैसला लिया है।
इसके लिए बनने वाली प्रोजेक्ट इम्पलिमेंटेशन यूनिट (परियोजना क्रियान्वयन इकाई) में अलग-अलग क्षेत्रों के नौ विशेषज्ञों को सलाहकार नियुक्त किया जाएगा। इसके अलावा कार्यो के पर्यवेक्षण और गुणवत्ता नियंत्रण के लिए भी सलाहकार एजेंसी की नियुक्ति होगी।
दैनिक भास्कर द्वारा इस योजना में बरती जा रही लापरवाही उजागर करने के बाद सदर मंजिल में गुरुवार को हुई महापौर परिषद की बैठक में यह मुद्दा छाया रहा। महापौर सुनील सूद ने संबंधित अधिकारियों से मिशन के कामकाज की गुणवत्ता और क्रियान्वयन में आ रही दिक्कतों के बारे में जवाब तलब किया।
एमआईसी की बैठक में अधिकारियों ने माना कि 2153 करोड़ रुपए के इस प्रोजेक्ट के क्रियान्वयन के लिए नगर निगम के पास पर्याप्त अमला नहीं है। धीरे-धीरे काम का बोझ बढ़ता जा रहा है। निगम में मौजूदा पदस्थ अधिकारियों में से कोई भी इस पूरी परियोजना के क्रियान्वयन में सक्षम नहीं है। यही वजह है कि शुरुआत में गुणवत्ता में कुछ कमी रह गई है।
उल्लेखनीय है कि इसके लिए पहले एक मुख्य अभियंता सहित सौ इंजीनियरों की भर्ती का एक प्रस्ताव बना था, लेकिन राज्य शासन ने इसे मंजूर नहीं किया। महापौर परिषद ने गुरुवार को प्रोजेक्ट इम्पिलिमेंटेशन यूनिट और पर्यवेक्षण और गुणवत्ता नियंत्रण सलाहकार की नियुक्ति के प्रस्ताव मंजूर कर लिए। इसके बाद योजना के क्रियान्वयन में निगम के मौजूदा स्टाफ की भूमिका काफी सिमट जाएगी। एशियाई विकास बैंक के प्रोजेक्ट उदय की तरह निगम के इंजीनियर केवल कामकाज का सुपरविजन करेंगे।
क्या होगा प्रोजेक्ट इम्पिलिमेंटेशन यूनिट में
इस यूनिट में परियोजना प्रबंधन, वित्त व लेखा, ई-शासन, सीवरेज और जलप्रदाय, यातायात, शहरी नियोजन, सिविल इंजीनियरिंग (सड़क), पर्यावरण और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के विशेषज्ञ नियुक्त होंगे।
केंद्र सरकार ने इन विशेषज्ञों के लिए 25 हजार रुपए प्रति माह प्रति विशेषज्ञ मानदेय तय किया है। मानदेय का भुगतान भी केंद्र सरकार करेगी। यह विशेषज्ञ मिशन के तहत चलने वाले विकास व सुधार कार्यो की योजना बनवाएंगे और उसका क्रियान्वयन भी इन्हीं की जिम्मेदारी होगी।
पर्यवेक्षण और गुणवत्ता नियंत्रण सलाहकार की नियुक्ति को भी मंजूरी
मिशन के तहत फिलहाल जारी कार्यो के पर्यवेक्षण और गुणवत्ता नियंत्रण के लिए भी सलाहकार एजेंसी नियुक्त करने के प्रस्ताव को मंजूर कर लिया गया। इसके साथ एमएएनआईटी बाहरी एजेंसी के रूप में क्वालिटी की जांच करेगी।
इसके अलावा अगले कुछ महीनों में शुरू होने वाले बीआरटीएस (बेसिक रोड ट्रांजिस्ट सिस्टम) के लिए पृथक सलाहकार एजेंसी की नियुक्ति की प्रक्रिया भी जारी है। जलप्रदाय और सीवरेज नेटवर्क के लिए भी इसी तरह की सलाहकार एजेंसी की नियुक्ति का प्रस्ताव विचाराधीन है। निगम अधिकारियों के अनुसार हर बड़ी परियोजना के लिए अलग-अलग पर्यवेक्षण और गुणवत्ता नियंत्रण सलाहकार नियुक्त किए जाएंगे।
शुल्क बढ़ाने में पिछड़ गया नगर निगम
मिशन से जुड़े अधिकारी भी इस बात को मानते हैं कि ई-शासन प्रणाली अपनाने के मामले में कुछ खास प्रगति नहीं हुई और जलप्रदाय शुल्क बढ़ाने में नगर निगम अपने वचन को पूरा नहीं कर सका है।
जेएनएनयूआरएम की मौजूदा स्थिति
वर्ष 2005 में मंजूर सिटी डेवलपमेंट प्लान:2153 करोड़
कुल मंजूर परियोजनाएं:1000 करोड़
वर्तमान में जारी कार्य:500 करोड़
(साढ़े तीन सौ करोड़ रुपए की नर्मदा परियोजना सहित)
नर्मदा परियोजना का क्रियान्वयन पीएचई निगम के डिपाजिट वर्क के रूप में कर रहा है।
इस हिसाब से नगर निगम के पास करीब डेढ़ सौ करोड़ के काम हैं।
अगले एक-दो महीने में 237 करोड़ रुपए की बीआरटीएस परियोजना शुरू होने के आसार
इसके अलावा एक हजार आवासों का निर्माण भी जल्द शुरू होने वाला है।
कुछ सवाल अब भी अनुत्तरित
जेएनएनयूआरएम की गड़बड़ियां उजागर होने के बाद नगर निगम ने एक साथ कई कदम उठाने का फैसला किया है, लेकिन अब भी कई सवाल अनुत्तरित हैं।
आखिर जिन ठेकेदारों ने गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा उनके खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
क्या नगर निगम अब तक हुए कार्यो की जांच कराएगा?
क्या एमपी नगर व कुछ अन्य विकास कार्यो को जानबुझकर छोटे-छोटे भागों में बांटा गया?
क्या राष्ट्रीय स्तर की बड़ी एजेंसियों को रोकने के लिए ऐसा क्या गया?
क्या इस बात की जांच होगी कि कुछ कार्यो की जानबुझकर राष्ट्रीय निविदाएं नहीं बुलवाईं गईं?
पुरानी गड़बड़ियों को ठीक करने और इसकी पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रोजेक्ट इम्पिलिमेंटेशन यूनिट क्या करेगी?
>> जेएनएनयूआरएम के क्रियान्वयन के प्रति हम गंभीर हैं। अनुभव नहीं होने से शुरूआत में कुछ गलतियां हो सकती हैं। जिन कार्यो में गुणवत्ता को लेकर शिकायत मिली है, उनकी जांच कराई जाएगी। केंद्र सरकार के सभी निर्देशों का पालन किया जा रहा है और आगे भी उनका ध्यान रखा जाएगा। नए कदम उठाने से क्रियान्वयन और बेहतर होगा।
सुनील सूद, महापौर