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Chhattisgarh
Raipur Raipur बड़गांव/दुगरूकोंदल. कांकेर जिले के ग्राम कोंडे के पास गुरुवार सुबह 10.30 बजे नक्सलियों ने रोड ओपनिंग के लिए निकली पुलिस पार्टी पर हमला कर दिया। हमले में बड़गांव थाने में पदस्थ एसएएफ के प्लाटून कमांडर समेत तीन पुलिसकर्मियों की मौत हो गई। नक्सली उनके हथियार दो एके-47 और एक दो इंच मोर्टार लूटकर ले गए।
पखांजूर-भानुप्रतापपुर मार्ग पर कोंडे बड़गांव से करीब 7 किमी दूर है। बुधवार रात 12 से 1 बजे के बीच दो सौ से ज्यादा नक्सलियों ने गांव पर धावा बोला। वे गांव में रहने वाले किसान और छोटे व्यवसायी शोभाराम निषाद की तलाश कर रहे थे।
पुलिस के लिए मुखबिरी करने के शक में तीन माह पहले नक्सलियों ने शोभाराम के बेटे रूपेंद्र समेत चार लोगों को अगवा कर लिया था। इनमें से एक हीरूराम जैन की नक्सलियों ने हत्या कर डाली थी। किसी तरह रूपेंद्र 15 दिन पहले नक्सलियों की पकड़ से भाग निकला।
दहशत में आ गया उसका पूरा परिवार गांव छोड़कर चला गया है। बुधवार रात को नक्सली जब रुपेंद्र के घर पहुंचे तो वहां कोई नहीं था। माओवादियों ने उसके घर और पान दुकान में तोड़फोड़ करने के बाद आग लगा दी।
नक्सलियों ने सड़क पर झाड़ियां काटकर गिरा दी और आधा दर्जन स्थानों पर सड़क खोद दी। नक्सलियों के डर से रास्ते पर सुबह से वाहनों की आवाजाही ठप हो गई। बंद रास्ते को खोलने के लिए बड़गांव और दुगरूकोंदल थानों से पुलिस पार्टियों को रवाना किया गया था।
बड़गांव से निकली पार्टी में एसएएफ के प्लाटून कमांडर माहूलाल, सहायक उपनिरीक्षक श्यामलाल अंबाले और आरक्षक सगराम सलाम समेत 11 से ज्यादा लोग थे। बड़गांव से करीब 2 किमी दूर छिंदपाल गांव के पास पुलिस दस्ता जीप से उतर गया। वहां से वे पैदल घटनास्थल की तरफ निकले थे। पार्टी रास्ते में खोदी गई सड़क को दो स्थानों पर ठीक करने के बाद आगे बढ़ी ही थी कि छिंदपाल पहाड़ी के पास घात लगाकर बैठे नक्सलियों ने पार्टी पर हमला बोल दिया। जवानों ने भी मोर्चा लेकर जवाबी फायरिंग की।
जबर्दस्त फायरिंग और नक्सलियों की संख्या को देखकर जवान पीछे हटने लगे, ताकि थाने से और ज्यादा फोर्स लाई जा सके। गोलीबारी में फंस गए प्लाटून कमांडर, अंबाले और सलाम नक्सलियों की घेरेबंदी से निकल नहीं पाए। इस बीच नक्सलियों के एक दस्ते ने पुलिस की जीप में आग लगा दी। हमला करने वाले नक्सलियों में वर्दीधारी और महिला नक्सली भी थे।
मुठभेड़ की सूचना पर बड़गांव से रवाना हुई 30 जवानों की दूसरी पार्टी पर भी रास्ते में नक्सलियों ने हमला किया पर जवान तैयार थे। 20 मिनट से ज्यादा चली गोलीबारी के बाद नक्सली जंगल में भाग गए। प्लाटून कमांडर माहूलाल, सलाम और अंबाले का कोई अता-पता नहीं चल रहा था। पहले पुलिस को शक हुआ कि कहीं नक्सली उनको बंधक बनाकर न ले गए हों।
सर्चिग के दौरान घटनास्थल से करीब एक फर्लाग दूर तेंदूपत्ते की झाड़ियों में तीनों पुलिसकर्मियों के गोलियों से छलनी शव मिले। नक्सली उनके पास के हथियार दो एके-47 लूटकर ले गए। आरक्षक सलाम के पास दो इंच मोर्टार था, जो गायब है। नक्सलियों और पुलिस के बीच फायरिंग शुरू होते ही आसपास के जंगल में तेंदूपत्ता तोड़ाई में लगे ग्रामीण भाग खड़े हुए।
घटना की सूचना मिलते ही कांकेर से एसपी प्रवीर दास समेत कई आला अफसर बड़गांव पहुंच गए। नक्सलियों की तलाश में सीआरपीएफ जवानों के साथ पुलिस पार्टियों को रवाना किया गया है। तीनों पुलिसकर्मियों के शव पोस्टमार्टम के लिए भानुप्रतापपुर भेजे गए हैं।
प्लाटून कमांडर माहूलाल बालाघाट (मप्र) के रहने वाले थे। सगराम सलाम रामपुर जुनवानी (कांकेर) और एएसआई श्यामलाल अंबाले डोंडीलोहारा (दुर्ग) के निवासी थे।घटना को लेकर इलाके में दहशत है। छिंदपाल इलाके में पहले भी कई नक्सली वारदातें हो चुकी हैं।
पेड़ के नीचे विस्फोटक
नक्सलियों ने सड़क पर गिरा दिए गए एक पेड़ के नीचे विस्फोटक बांध रखा था। 10 किलो से ज्यादा के विस्फोटक को तार से जोड़ा गया था, ताकि दूर से उसे ट्रिगर किया जा सके। पुलिस ने मौके पर ही विस्फोटक को नष्ट किया।
श्रमिक बन रची साजिश
कापसी. पुलिस पार्टी पर हमला करने पहुंचे कई नक्सली तेंदूपत्ता तोड़ने वाले ग्रामीणों के वेश में थे। बुधवार रात उन्होंने ग्राम गुमड़ीडीह और कोंडे के बीच कई पेड़ काटकर सड़क पर गिरा दिए थे। इन पेड़ों को हटाते हुए पुलिस आगे बढ़ती जा रही थी। जंगल के अंदर नक्सली आदिवासियों और ग्रामीणों के वेश में पत्ते तोड़ने का नाटक करते रहे। अचानक नक्सलियों ने हथियार निकालकर पुलिस पर हमला बोल दिया।