अजमेर. विवाहिता का अपहरण कर दुराचार करने और उसे कोठे पर बेच आने के मामले में बुधवार को फास्ट ट्रेक कोर्ट ने तीन महिलाओं सहित चार आरोपियों को दोषी ठहराते हुए अलग-अलग धाराओं के तहत कठोर कैद व जुर्माने की सजा सुनाई।
बिहार के कटिहार कस्बे के मूल निवासी मोईन उर्फ मोइनुद्दीन को अपहरण, साजिश व दुराचार के आरोप में दस साल कठोर कैद और तीन हजार जुर्माने से दंडित किया गया। उसकी पत्नी सरबदी को 5 साल कठोर कैद और दो हजार रुपए जुर्माने की सजा मिली। गंगाबाई व इन्दिरा को साजिश व वेश्यावृत्ति कराने के आरोप में सात-सात साल कैद और तीन-तीन हजार से ज्यादा के जुर्माने से दंडित किया गया।
विश्वास का मिला सिला
अंदरकोट इलाके में रहने वाले अब्दुल शरीफ की बेटी 21 वर्षीय सलमा (बदला हुआ नाम) की शादी कुछ साल पहले बबलू नामक युवक से हुई थी। शादी के कुछ समय बाद ही दोनों में अलगाव हो गया। इसी दौरान रिश्ते में जीजा और बहन लगने वाले सूरत निवासी मोइन और सरबदी की सलमा से नजदीकी बढ़ गई। नवंबर 2006 में सलमा अचानक लापता हो गई।
उसके पिता अब्दुल रशीद ने उसे कई जगह तलाश किया और आखिर एसपी के जरिए उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने खोजबीन शुरू की और मोईन व सरबदी के पास सूरत जा पहुंचे। दोनों से सलमा के बारे में पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि वे उसे मुंबई के कमाठीपुरा में एक कोठे पर बेच आए हैं। पुलिस ने अब्दुल शरीफ को साथ ले जाकर 16 जनवरी 2007 को कमाठीपुरा में वेश्यावृत्ति के अड्डे पर छापा मारकर सलमा को बरामद कर लिया।
अड्डा चलाने वाली गंगाबाई तो पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ी लेकिन उसकी सहायक इन्दिरा के साथ ही मोईन और इन्दिरा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। 18जनवरी, 07 को पीड़िता ने पुलिस को बताया कि मोईन व सरबदी उसे नशीली चीज खिलाकर अपने साथ ले गए थे।
मुंबई में गंगाबाई के अड्डे पर ले जाकर मोईन ने उससे दुराचार किया और फिर दोनों उसे बेचकर चले गए। सलमा की रिपोर्ट पर पुलिस ने भा.दं.सं. की धारा 376, 368, 366, 120 बी के अलावा अनैतिक व्यापार अधिनियम की धारा 5 व 6 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया। 27 सितंबर, 07 को गंगाबाई भी पुलिस के हत्थे चढ़ गई और उसके खिलाफ अलग से कार्रवाई शुरू हुई।
पीड़िता के बयान व बरामदगी अहम
अदालत के समक्ष लोक अभियोजक रामस्वरूप और पंकज जैन ने आरोप साबित करने के लिए 10 गवाह और 27 दस्तावेज पेश किए। पीड़िता ने अदालत में जुल्मों की दास्तान बयां की वहीं कमाठीपुरा से उसे बरामद कर लाने वाले एएसआई हिम्मत सिंह की गवाही भी अहम रही।