कोटा. महिला अभिकर्ता पुष्पा जैन के करोड़ों के फर्जीवाड़े की जांच रिपोर्ट अब अल्प बचत विभाग ने रजिस्टर्ड डाक से सीआईडी-सीबी को भेजी है। दुबारा मुकदमा दर्ज किया जाए या नहीं, इस बात को लेकर सीआईडी-सीबी कोटा ने जयपुर स्थित आला अफसरों से मार्गदर्शन मांगा है।
अल्पबचत विभाग ने कुछ दिन पहले 1999 से लेकर 2000-03 तक की जांच करने के बाद 1265 पेज के मूल दस्तावेज पहले पुलिस को और बाद में सीआईडी-सीबी कोटा को भेजे थे।
चूंकि मामला सीआईडी-सीबी में चल रहा है, इसलिए पुलिस ने अल्पबचत विभाग को सीआईडी-सीबी कोटा के पास भेजा। वहां उन्होंने यह कहकर दस्तावेज लेने मना कर दिया कि इसमें दुबारा मुकदमा दर्ज होगा। इस घटनाक्रम के बाद अल्पबचत विभाग ने दुबारा 29 पेज की जांच रिपोर्ट (मूल दस्तावेज छोड़कर) रजिस्टर्ड डाक से सीआईडी सीबी कोटा को भेजी है।
अब सीआईडी-सीबी कोटा इस बात को लेकर असमंजस में है कि उसे पिछले मुकदमे में शामिल कर लिया जाए या नई एफआईआर दर्ज की जाए। बहरहाल, इन हालातों के बीच अल्पबचत विभाग की उपनिदेशक दीपिका मित्तल ने 7 मई को कोषाधिकारी कोटा को चार्ज नहीं दिया। जिला कलेक्टर ने भी उन्हें अभी तक रिलीव नहीं किया।
दस्तावेज जांच के लिए भेजे
सीआईडी-सीबी कोटा ने अल्पबचत घोटाले की जांच शुरू कर दी है। मूल दस्तावेज फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिए गए हैं।
अल्पबचत विभाग ने भी ली कानूनी राय
मामले को जल्द से जल्द निपटाने के लिए अल्पबचत विभाग भी कानूनी सलाह ले रहा है। इसके लिए फाइल एडीएम प्रशासन राकेश जायसवाल के पास भिजवाई गई है।
नया पेंच, सीआईडी-सीबी सतर्क
सीआईडी-सीबी कोटा के डिप्टी एसपी केके शर्मा ने बताया कि चूंकि पहले 2003-04 से लेकर 2005-06 की जांच पर महिला अभिकर्ता के खिलाफ मुकदमा दर्ज है। कानूनी प्रावधान है कि 2005-06 के बाद यदि जांच की जाती है और फर्जीवाड़ा मिलता है तो उसे मुकदमे में शामिल कर लिया जाता है लेकिन, 2003-04 से पहले के फर्जीवाड़े को मुकदमे में शामिल करने के लिए कोई कानूनी प्रावधान नहीं है।
इस सिलसिले में जयपुर स्थित सीआईडी-सीबी के आला अफसरों से मार्गदर्शन लिया जा रहा है। शर्मा का कहना है कि यदि 2003-04 से पहले की जांच को मुकदमे में शामिल करने के बाद यह पता चलता है कि ऐसा नहीं किया जा सकता तो इसका लाभ आरोपी ले सकता है।