कोटा.
प्रशासन की मुस्तैदी के बावजूद जिले में हुए सामूहिक विवाह सम्मेलन में कई नाबालिग विवाह बंधन में बंध गए। डीसीएम क्षेत्र में प्रजापति समाज के सामूहिक विवाह सम्मेलन में सात नाबालिग जोड़े हमसफर बन गए।
इस अवसर पर स्वायत्तशासन राज्यमंत्री सुरेन्द्र गोयल, संसदीय सचिव भवानीसिंह राजावत सहित अन्य पदाधिकारी भी उपस्थित थे। जैसे ही वहां नाबालिग जोड़ों के विवाह होने की जानकारी मिली मंत्री गोयल वहां से निकल लिए। प्रशासन ने पुलिस व महिला एवं बाल विकास विभाग की टोली भेजकर मौके पर जांच करवाई।
डीसीएम क्षेत्र में हुए सामूहिक विवाह सम्मेलन में 76 जोड़ों को विवाह होना तय किया गया। इसमें स्वायत्तशासन राज्यमंत्री को जोड़ों को आशीर्वाद देने के लिए बुलाया गया था। यहां तो लगभग सात जोड़े नाबालिग बताए गए।
इनमें बूंदी जिले रामपुरा के धर्मराज पुत्र मोतीलाल, लक्ष्मी पुत्री बलराम डीसीएम, पिंकी पुत्री रामचरण संतोषीनगर,दुर्गा पुत्री राकेश रामगंजमंडी के अतिरिक्त मंजू, पूजा, रेखा व सुमित्रा भी थीं। ये सभी नाबालिग दिखाई दे रहे थे लेकिन, आयोजक समिति के अध्यक्ष नंदलाल पैगोरिया किसी के भी नाबालिग होने से इंकार कर रहे हैं।
जैसे ही प्रजापति समाज के सामूहिक विवाह सम्मेलन में नाबालिगों के विवाह होने की सूचना प्रशासन को मिली। वहां एएसपी, तहसीलदार व महिला एवं बाल विकास विभाग की उपनिदेशक नफीसा अख्तर को जांच के लिए भेजा गया। उन्होंने एक-एक जोड़ों की जांच की।
क्या कहते हैं अधिकारी
>> प्रशासन के आदेश पर मौके पर जाकर जांच की गई। इसमें कोई जोड़ा नाबालिग नजर नहीं पाया गया।
राजकुमार, एएसपी
>> नाबालिग जोड़ों की शादी होने की सूचना मिलने पर यहां जांच की जा रही है। अभी जांच पूरी नहीं हुई। जिन जोड़ों को नाबालिग माना गया है उनसे प्रमाणपत्र मांगा गया है।
नफीसा अख्तर, उपनिदेशक महिला एवं बाल विकास विभाग
चतुर्वेदी ने पहले करवाई जांच
राज्यसभा सदस्य प्रो. ललित किशोर चतुर्वेदी ने मेघवाल समाज के सामूहिक विवाह सम्मेलन में पहुंचने से पहले उसमें नाबालिग जोड़ों की जांच करवाई। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों से कहा कि इस विवाह सम्मेलन के बारे में जांच करके उन्हें बताया जाए कि कोई नाबालिग जोड़ा तो वहां नहीं है। नाबालिग जोड़ा नहीं होने की पुष्टि के बाद वे वहां पहुंचे तथा सांसद कोष से वहां पांच लाख रुपए देने की घोषणा की।
ग्रामीण क्षेत्र में भी हुए बाल विवाह दिन में ही करवा लिए फेरे
रावतभाटा.
समीपवर्ती जावरा व नागणी गांव में दो नाबालिग बालिकाओं की शादी कराई गई। जावरा में हुए वैवाहिक कार्यक्रम में बालिका का विवाह बंबोरीकलां के भैरु के साथ हुआ। परिजनों के अनुसार बेकार के झंझट में पड़ने के बजाए हमनें दिन में ही फेरे करवा लिए। मदारचौक में बाल विवाह की जानकारी मिलने पर दूल्हा ही बदल दिया गया।
मुर्हत नहीं, पाती से हुए विवाह
रावतभाटा इलाके में भील समुदाय शादी के लिए किसी भी धार्मिक स्थल पर पाती लेकर भगवान से विवाह की अनुमति लेते हैं और उस दिन बच्चों का विवाह कर दिया जाता है। इस बार भी भील समुदाय ने परपंरा के अनुरुप ही कई पाती विवाह किए हैं।
इनका कहना है.
>> बुधवार को एकलिंगपुरा में बालविवाह की जानकारी मिली है। पुलिस जांच कर रही है। बाल विवाह का मामला मिलने पर मामला दर्ज किया जाएगा।
मिट्ठू सिंह, एएसआई, रावतभाटा
>> मैं सामूहिक विवाह सम्मेलन में गया था। लेकिन, वहां नाबालिग जोड़ों का विवाह हुआ, इसकी मुझे जानकारी नहीं है। मेरे सामने न तो दूल्हा-दुल्हन आए न ही मैंने किसी नाबालिग को वहां शादी करते देखा। मुझे आयोजकों ने कहा था कि बालिगों की ही शादी हो रही है।
सुरेन्द्र गोयल, स्वायत्त शासन राज्यमंत्री
समाजों ने रुकवाए 71 बाल विवाह
प्रशासन के साथ ही इस बार समाजों ने भी नाबालिग विवाह रुकवाने में अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने अपने स्तर पर ही जांच करके 71 जोड़ों के विवाह रोक दिए।
कहां कितने नाबालिग विवाह रुके
समाज कुल जोड़े विवाह हुआ रूके
प्रजापति 105 65 40
गुर्जर 33 22 11
माली 100 80 20
11 नाबालिगों के विवाह रुकवाए
महिला एवं बाल विकास विभाग ने सामूहिक विवाह समारोहों में 11 नाबालिगों के विवाह रुकवाए।