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Shekhawati Shekhawati सीकर. नरेगा में सरकारी दांवों की पोल खोलती यह केवल दो गांवों की बानगी है। नरेगा की खामियों की खुलती पोल के बाद आज भी प्रशासन हाथ पर हाथ धरे बैठा है। दिलचस्प बात तो यह है कि कलेक्टर निरीक्षण में मिली खामियों को दूर करने का बीड़ा भी अभी तक नहीं उठाया गया है।
गुंगारा व रघुनाथगढ़ में खामियों के फेरिस्त काफी लंबी है। जिला कलेक्टर मंजू राजपाल ने जब गुरुवार निरीक्षण किया तो दांवों की पोल उनके सामने खुलती चली गई। हालांकि कलेक्टर ने मामलों को गंभीरता से लिया और खामियां दूर करने के निर्देश भी मौके पर दे दिए।
काट लो भुगतान
रघुनाथगढ़ गांव में बड़ा जोहड़ा में खुदाई, मेडबंदी कार्य का निरीक्षण किया। यहां पांच मजदूर कलेक्टर को अनुपस्थित मिले। इसी तरह रामसागर पर 36 से 29 मजदूर अनुपस्थित मिले। कलेक्टर ने कम कार्य करने वाले मजदूरों का पेमेंट काटने के निर्देश दिए।
श्रमिकों ने कलेक्टर को बैंक खाते नहीं खुलने की शिकायत भी की। रामसागर जोहड़ा खुदाई कार्य के निरीक्षण के दौरान भी टास्क कार्य कम होने की शिकायत की। जिला कलेक्टर ने विकास अधिकारी को मामले की जांच करने के निर्देश दिए।
पैसों के बदले घाघरा-लूगड़ी
किसी को काम नहीं मिल रहा तो किसी को मजदूरी का भुगतान नहीं किया जा रहा। मजदूरों को ताज्जुब तब हुआ, जब निरीक्षण करने पहुंची कलेक्टर ने 100 दिन का काम पूरा होने पर महिलाओं को घाघरा लूगड़ी गिफ्ट देने की बात कही। हालांकि कई मजदूरों ने कलेक्टर से मजदूरी की शिकायत की, लेकिन गिफ्ट का नया शिगूफा मजदूरों को मिलने से उनके चेहरे पर थोड़ी चमक जरूर आ गई।
एक किमी और प्यास!
तेज धूप में श्रमिकों के हाल किस तरह बद से बदतर हो रहे हैं। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि मजदूरों को एक किलोमीटर दूर जाकर प्यास बुझानी पड़ती है। कलेक्टर ने पानी की व्यवस्था करने के निर्देश विकास अधिकारी को दिए हैं।