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आ गया शहीदों को नमन करने का दिन

जिस देश में हम आजादी के साथ आज सांस ले रहे हैं उसे गुलामी से मुक्त कराने के लिए डेढ़ सौ साल पहले हुए संघर्ष की कहानियां या तो इतिहास में या फिर पाठ्य पुस्तकों में कैद हैं। अंग्रेजों से स्वतंत्रता प्राप्ति के पहले 1857 की इसी क्रांति के बारे में बाद में लिखा गया था : ‘चमक उठी सन सत्तावन में वह तलवार पुरानी थी। बुंदेले हर बोलों के मुंह हमने सुनी कहानी थी। खूब लड़ी मर्दानी वो तो झांसी वाली रानी थी।’

10 मई हमारे इसी संकल्प का दिन है कि हम शहीदों के बलिदानों को अपनी स्मृतियों से कभी ओझल नहीं होने देंगे। आइए, उन शहीदों की याद में हम आज शाम छह बजकर 57 मिनट पर डेढ़ सौ सेकंड (ढाई मिनट) का मौन रखें। जो जहां पर और जिस भी स्थिति में हो, वहीं मौन श्रद्धांजलि व्यक्त कर सकता है।

(भास्कर परिवार)





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