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‘संत नहीं, वेश्या बनना पसंद करूंगा’

क्रिकेटर वेश्याओं से अलग नहीं होते.. महेश भट्ट की फिल्म जन्नत का ये डॉयलॉग कितने विवादों को जन्म देगा, ये तो नहीं पता, लेकिन इतना जरूर है कि इस संवाद से बिंदास महेश भट्ट को कोई चिंता नहीं।

फिल्म जन्नत में इमरान हाशमी ने एक सट्टेबाज की भूमिका की है। इसमें एक जगह उनका चरित्र कहता है- देखिए सर, क्रिकेटर और वेश्याओं के बीच ज्यादा फर्क नहीं होता। दोनों की जवानी खत्म तो कहानी खत्म।

इस पर बिंदास महेश भट्ट कहते हैं कि जी हां, जन्नत में ठीक यही संवाद है लेकिन इसमें गलत क्या है। अगर आप इस बारे में सोचें तो हम सभी वेश्या ही तो है। कम से कम ये अपना वादा तो पूरा करती हैं। मैं भी वेश्याओं से अलग नहीं हूं।

मैं भी आनंद बेचता हूं और हॉ मैं तो संत के बजाय वेश्या बनना पसंद करूंगा। अपनी फिल्म अर्थ, जख्म और वो लम्हे से कई विवादों को हवा देने वाले महेश भट्ट इस बार भी पीछे हटने वाले नहीं।





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inam
Saturday, 10th May 2008, 8:49
wat a rabish idea if young age is over than story is over no one can stop his age, every one forwards in other werk according there nature like circkter 2. after cirkerter he can be tutor or empyer lot of fields are there, but its look that film maker want to keep his film as a matter of dissison in the indian society.
HAPPY
Saturday, 10th May 2008, 16:36
am agree with mr. mahesh bhatt. go ahead sir !!!!!!!!
atul
Wednesday, 14th May 2008, 8:32
i am agree with mahesh bhatta.he is absolutely right.