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Chandigarh Chandigarh चंडीगढ़बीते साल में चंडीगढ़ के औसत परिवारों का मासिक खर्च 12-15 हजार रुपए था जो कि इस साल बढ़ कर 16 से 20 हजार रुपए तक पहुंच गया है। महंगाई की मार का सबसे ज्यादा असर रसोई पर है। इन्फ्लेशन की दर आम आदमी को कम ही समझ आती है, लेकिन हर महीने कुछ ना कुछ ज्यादा जेब ढीली करनी पड़े, तो पता लगता है कि मार कहां पड़ रही है।
सेक्टर-42 के यादविंदर सिंह पिछले साल परिवार के लिए मासिक 1600 से 2000 रुपए का राशन लेते थे। इस साल उनका राशन बिल 2600 से 3000 रुपए तक पहुंच गया है। ऐसा तब है जब उन्होंने एक-दो चीजों पर कट लगाना शुरू किया है। सेक्टर-37 के किराना व्यापारी राजेन्द्र कुमार मानते हैं कि परिवारों का औसत राशन बिल ही 30 फीसदी से अधिक बढ़ गया है।
पहले लोग इतना भाव नहीं पूछते थे लेकिन अब वे बिल को लेकर भी पूछताछ करते हैं और उनकी पहली प्रतिक्रिया होती है-इतना बिल, गुजारा कैसे होगा। प्रति व्यक्ति सर्वाधिक आमदनी वाले नौकरीपेशा लोगों के इस शहर में अभी तक लोग राशन के बिल से इतना नहीं घबराते थे, लेकिन महंगाई ने उनके भी हाथ-पांव फुला दिए हैं। राशन के अलावा फल-सब्जियां भी 15-20 फीसदी तक महंगी हैं। घरों का किराया सलाना 5-7 फीसदी बढ़ना तय होता है।
पैट्रोल बिल भी 500-800 रुपए मासिक बढ़ गया है। स्कूल फीस, डॉक्टर फीस, दवाईयां, कपड़े, यानि ऐसा कुछ भी नहीं है जिसका दाम कम हुआ हो।
क्या है सस्ता
इस वक्त बाजार में सिर्फ आलू प्याज को सस्ते कहा जा सकता है। रिटेल कंपनियों के स्टोर्स पर आलू-प्याज 6.50-7 रुपए किलो बिक रहे हैं तो किसान मंडी में यह 8 रुपए किलो की दर पर बिक रहे हैं। पिछले साल इनके दाम 10 से 12 रुपए प्रति किलो के दाम पर रहे थे। ऐसे में आम आदमी आलू प्याज को ही अधिक मात्रा में खरीद कर खुद को तसल्ली दे रहा है कि चलो कुछ तो सस्ता मिल रहा है।
दूध ने भी बिगाड़ा बजट
हालत यह है कि जिन परिवारों में औसतन 2 किलो दूध प्रतिदिन लिया जाता है, उनका दूध का मासिक बिल ही 240 रुपए बढ़ गया है। 18 रुपए किलो बिकने वाला वेरका का दूध इस समय 22 रुपए प्रति किलो बिक रहा है और आने वाले दिनों में एक-दो रुपए की बढ़ोतरी और भी संभव है।
बचत पर पड़ी है मार
महंगाई के चलते औसत परिवारों के मासिक खर्च में हुई 15-20 फीसदी की बढ़ोतरी में 8-10 फीसदी तक वेतन बढ़ने से राहत हो सकती है लेकिन बाकी की बढ़ोतरी सीधे उनकी बचत को प्रभावित कर रही है। आम आदमी जो मासिक बचत करता था, वह अब महंगाई की भेंट चढ़ रहा है।