बम लहरी. दोपहर की गर्मी और कूलर की ठंडक में मौसम का जो कॉकटेल बनता है उसमें तन तो मट्ठा कुछ करना नहीं चाहता, सिर्फ मट्ठा पीकर पड़ा रहता है पर मन चिंतन करने लगता है। ऐसी ही एक अलसाई दोपहर में अपने मन में भी एक सुरीला विचार आया है।
बहुत दिन हुए हमने किसी का सम्मान नहीं किया है जबकि इन मामलों में हमारा रिकॉर्ड स्वर्णिम रहा है। कई सम्मानित लोगों को हमने फूलों और हारों से इतना लादा है कि उनके परिजन को उन्हें ढूंढने में हफ्ता बीत गया है। हमारे इलाके के फूल उगाने वाले किसानों से जाकर पूछो, वे आत्महत्या शब्द को आज तक नहीं जानते।
सुना है कि महाबली खली इन दिनों हमारे देश में हैं। यह मौका हमें चूकना नहीं चाहिए और अतिशीघ्र उन्हें बुलवाना चाहिए। हमारा कत्र्तव्य है कि हम उनका सम्मान करें। सिर्फ श्रीफल ही तो देना है, क्योंकि इतनी गर्मी में शॉल तो वो खुद ओढ़ना नहीं चाहेंगे।
उनके बारे में मंच से कुछ बोलना भी नहीं है, क्योंकि उनके बारे में कुछ भी बोलना सूरज को दीया दिखाने के समान है जबकि सूरज का रौद्र रूप देखकर दीया खुद सूरज को देखने से इनकार कर देगा। सूरज की बात छिड़ी है तो चंदा की बात भी छेड़ दूं। सम्मान समारोह के लिए चंदा भी करना पड़ेगा और वह मैं कर लूंगा, बस आपसे इतना सहयोग चाहिए कि चंदे का हिसाब मत पूछना।
खली को यहां बुलाने में हमारा ही फायदा है। ऐसे कई हैंडपंप हैं जिन्हें हमारे यहां के महाबली ‘या अली’ और ‘बजरंग बली’ का उद्घोष करते हुए हत्थे को हिलाने की नाकाम कोशिश करते रहे हैं और हैडपंप से पानी की बजाय उनके पसीने से बाल्टियां भरती रही हैं। विनम्र खली से निवेदन कर लेंगे तो हम हैंडपंप से ‘जंग’ करें इसके बजाय खली ही हैंडपंप की जंग दूर कर देंगे।
आपको अच्छी तरह पता है कि खली बड़ी-बड़ी लोहे की कुर्सियां और छड़ें इशारों में मोड़ देते हैं। क्या आपको नहीं लगता कि जो पानी के टैंकर रसूखदारों की गलियों में तो जाते हैं पर हमारे मोहल्ले की तरफ कभी नहीं मुड़ते।
खली आए तो हम उनसे टैंकर भी मुड़वा लेंगे। सुरक्षा संबंधी फिक्र भी आप मत करो। आयोजन स्थल पर पर्याप्त पुलिस बल स्वेच्छा से आएगा। आखिर बेचारे पुलिस वालों को भी खली से यह पता करना है कि पुलिस की नौकरी में लंबी छुट्टी कैसे मिल सकती है। खली के नाश्ते-खाने का इंतजाम आप सम्हाल लो तो बुलाने की जवाबदारी मेरी। आप सभी सहमत हों तो लगाऊं फोन।