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‘सालभर बाद पानी ही पानी’

इंदौर. demand निगम परिषद सम्मेलन में शुक्रवार को आठ घंटे विपक्ष के आरोपों को खामोशी से सुनने के बाद महापौर डॉ. उमाशशि शर्मा ने बजट भाषण में तीखे-तेवर अपनाते हुए कांग्रेसी पार्षदों को कूप-मंडूक बताया।

कांग्रेसियों के विरोध करने पर उन्होंने कहा मैंने तुम्हे शांति से सुना है, तुम्हें भी मेरी बात सुनना पड़ेगी। चुपचाप जाकर कुर्सी पर बैठो। किसी ने विरोध किया तो मुझसे बुरा नहीं होगा। हालांकि कांग्रेसी शांत नहीं हुए और सभापति के सामने धरना देकर बैठ गए। इस बीच बजट सहित एजेंडे के दूसरे मुद्दे बहुमत से स्वीकृत होते रहे।

बजट पेश होने के तीसरे दिन गांधी हॉल में हुई बहस बैठक में दिनभर आरोप-प्रत्यारोप के बीच ११क्क्.१९ करोड़ के निगम बजट को मंजूरी मिल गई। महापौर ने कहा काला चश्मा लगाकर बैठे विपक्ष को किसी भी रंग की दाल काली ही नजर आती है। हमने नया कर न थोपकर जनता को सुकून देने वाला बजट पेश किया। बावजूद इसके सुझाव या संशोधन के बजाय विपक्ष विरोध की परंपरा पर कायम रहा।

उन्होंने कहा पानी की कमी को देखते हुए नर्मदा के तीसरे चरण का काम शुरू किया। एक साल रुक जाओ इतना पानी पिलाऊंगी कि पानी के नाम का रोना भूल जाओगे। केंद्र सरकार के निर्देशानुसार बहुमंजिला पार्किग का काम बीओटी या पीपीपी से होना है। पीपीपी का विरोध करने वाले कांग्रेसी हम पर अंगुली उठाने के बजाय दिल्ली में बैठे उन आकाओं से जवाब तलब करे जो इस सिस्टम को बढ़ावा दे रहे हैं।

केंद्र से 54 करोड़ के कचरा प्रबंधन की मंजूरी मिलने से बजट में सफाई के लिए कम राशि का प्रावधान किया क्योंकि प्रोजेक्ट के तहत इतने संसाधन आएंगे कि बजट की जरूरत नहीं पड़ेगी। आधा घंटे के भाषण में महापौर ने कहा केंद्र की गलत नीतियों से बढ़ी महंगाई के कारण जेएनएनयूआरएम के तहत स्वीकृत प्रोजेक्ट घाटे में चल रहे हैं।

अंशदान के साथ अंतर राशि जुटाना निगम के लिए मुश्किल है। बावजूद इसके हमने संपत्ति कर तो नहीं बढ़ाया लेकिन केंद्र के निर्देश पर जल कर बढ़ाना पड़ा। कर्ज की किस्तें भी समय पर चुकाई। विपक्ष के अनावश्यक विरोध ने साबित कर दिया कि वह विकास में कितना सहभागी है।

सभापति का विपक्ष मोह
महापौर ने भाषण की शुरुआत में सभापति शंकर लालवानी की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा सभापति ने मोह के चलते नियमों के विपरीत जरूरत से ज्यादा बोलने का समय दिया।

महापौर के डायस तक जा पहुंचे
महापौर द्वारा विपक्ष को कूप-मंडूक कहने से नाराज नेता प्रतिपक्ष अंगुली उठाकर उस डायस तक पहुंचे जहां से महापौर संबोधित कर रही थीं। एक बार नेता प्रतिपक्ष सदन के बाहर भी चले गए थे।

पोरवालजी विपक्ष की क्लास ले लो
प्रोजेक्ट कंसलटेंसी के सवाल का जवाब देते हुए महापौर ने जनकार्य समिति प्रभारी ललित पोरवाल को कहा जेएनएनयूआरएम के नियमों की किताब हाथ में लेकर एक दिन विपक्ष की क्लास ले लो।

विधायकों को क्यों नहीं बुलाते
नाराज विधायक अश्विन जोशी ने कहा महापौर कायदे की बात जरूर करती हैं लेकिन कायदों से लेना-देना नहीं। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद भी जेएनएनयूआरएम की एक भी बैठक में मुझे तो दूर इनके भी किसी विधायक को नहीं बुलाया।

आठ मिनट में 29 मुद्दे स्वीकृत
महापौर के भाषण से छिड़ी बहस के बीच एजेंडे में शामिल 32 में से 29 मुद्दे आठ मिनट में स्वीकृत हो गए। 17 पर कांग्रेसियों ने विरोध व्यक्त किया तो 12 सर्वसम्मति से मंजूर हुए।

बब्बन बांटते रहे छाछ
सदन में बजट बहस के बीच एल्डरमैन बब्बन शर्मा जेब में पाइप लेकर छाछ की थैलियां मंत्री खेमे के पार्षदों को बांटते नजर आए। इस पर सभापति ने नाराजी व्यक्त करते हुए कहा यह कर्मचारियों का काम है, आप जगह पर बैठें।

झंडे को तो ऊंचा रहने दो
हंगामे के बीच एजेंडे में शामिल ‘झंडा ऊंचा रहे अभियान’ के लिए अनुदान का कांग्रेसी पार्षद विरोध करने पहुंचे तो श्री पोरवाल ने कहा झंडा तो सबका है। विरोध मत करो, उसे ऊंचा ही रहने दो।

चुपचाप तमाशा देखते रहे बागी
महापौर और उनके समर्थक पार्षद डटकर विपक्ष के आरोप और विरोध का मुकाबला करते रहे। वहीं अटकलों के बाद इस्तीफा देकर बैठे मंत्री गुट के 19 पार्षद और चार एल्डरमैन सदन में तो पहुंचे लेकिन हर मौके पर खामोशी से तमाशा देखते रहे।





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