जयपुर. राज्य सरकार की ओर से शहर के एक प्रमुख कॉलोनाइजर के बाद अब अन्य कॉलोनाइजरों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी किए जाने से जयपुर में करीब 10 हजार करोड़ रुपए का निवेश फिलहाल खतरे में पड़ गया है। रीयल एस्टेट कंपनियों ने अपने प्रोजेक्ट रोक दिए हैं।
एक रीयल एस्टेट कंपनी के बड़े अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि ये कंपनियां इस उम्मीद में यहां आई थीं कि सेज के आने पर इन्फ्रास्ट्रक्चर तेजी से तैयार होगा और जयपुर की ग्रोथ सबसे ज्यादा होगी। यह शहर दिल्ली, गुड़गांव के काफी नजदीक है। इससे जयपुर में अंसल, ओमेक्स, वाटिका, सनसिटी, रहेजा जैसी बड़ी कंपनियों ने अपनी आवासीय योजनाएं शुरू कर दी थीं।
इसके अलावा अलवर, भिवाड़ी, नीमराणा, कोटा, जोधपुर, अजमेर में भी इन कंपनियों ने अपने प्रोजेक्ट शुरू कर दिए थे। एक अनुमान के अनुसार अब तक राज्य में 20 हजार करोड़ रुपए का निवेश हो चुका है। ये सभी कंपनियां चिंतित हैं। इनका कहना है कि इससे इमर्जिग राजस्थान की छवि पर भी बुरा असर होगा।
आम निवेशक फिलहाल जमीन के सौदों में हाथ डालने से कतराने लगा है। इस कारण आवासीय व कॉमर्शियल योजनाओं में बुकिंग का काम रुक गया है। प्रॉपर्टी कारोबारी व बिल्डर सरकार के अगले कदम का इंतजार कर रहे हैं। कॉलोनाइजर मान रहे हैं कि अगर यह असमंजस दूर नहीं हुआ, तो प्रॉपर्टी बाजार चौपट हो जाएगा।
राजस्थान हाउसिंग बोर्ड के अध्यक्ष अजयपाल सिंह के बेटे की ‘माई हवेली’ आवासीय योजना व आसपास की जमीनों को अवाप्त करने के कदम से इस इलाके के अन्य कॉलोनाइजरों को यह डर सता रहा है कि सरकार जब अपनी ही पार्टी के नेता पर गाज गिरा सकती है, तो फिर उनकी क्या बिसात। उनकी जमीन की भी बारी आ सकती है।
अजमेर रोड पर महला के पास एक बड़ी टाउनशिप के निदेशक ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि अप्रूव्ड योजनाओं पर सरकार द्वारा तलवार लटकाने से आम निवेशक भ्रमित हो गया है।
दो दिन से जमीन के सौदे ठहरे हुए हैं, जबकि पहले बुकिंग करवा चुके निवेशक अब अवाप्ति के भय से कॉलोनाइजरों से वस्तुस्थिति के बारे में पूछताछ करने में लगे हुए हैं। लोगों में यह भ्रम फैल गया है कि सरकार अजमेर रोड से लगती किसी भी आवासीय योजना की जमीन कभी भी अवाप्त कर सकती है।