जयपुर. एप्रूव्ड योजनाओं पर हुई कार्रवाई और कॉलोनाइजरों के मामलों की पड़ताल किए जाने के दौरान चार साल में प्रदेशभर में बड़े स्तर पर हुई 90-बी व लैंड यूज का मामला फिर उभर कर आ गया है। राज्य सरकार की ओर से गुपचुप आवासीय व व्यावसायिक योजनाओं की 90-बी और लैंड यूज के मामलों की सूची बनाने का काम चुनींदा अफसरों से कराया जा रहा है।
राजस्थान हाउसिंग बोर्ड के अध्यक्ष अजयपाल सिंह, नेताओं और बड़े कॉलोनाइजरों की जमीनें तलाशने में हाउसिंग बोर्ड के आयुक्त जुटे हैं। ऐसे कॉलोनाइजरों की स्कीमें भी चिह्न्ति की गई हैं, जिन्होंने 100-100 बीघा का रूपांतरण व लैंड यूज कराया। जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) में पिछले चार साल में 35 हजार बीघा भूमि की 90-बी और 20 हजार बीघा का भू-परिवर्तन हुआ।
जानकारी के अनुसार सरकार की मंशा यह पता लगाने की है कि कितने हजार बीघा की 90-बी और लैंड यूज हुआ है। सरकार के इस कदम से वाकिफ कुछ बिल्डर एक दूसरे से कहते नजर आ रहे हैं कि सरकार आखिर क्या चाहती है? 90-बी और लैंड यूज का पूरा हिसाब-किताब तो पहले ही दिया जा चुका है। अब कोई बकाया थोड़े ही है।
जेडीए में छह साल पूर्व तक कॉलोनियों के नियमन में कृषि भूमि के अकृषि प्रयोजनार्थ रूपांतरण के बारे में आम व्यक्ति अनभिज्ञ था, लेकिन भाजपा सरकार आने के बाद जमीनों में आए बूम ने 90-बी की प्रक्रिया कठिन कर दी। इस दौरान बड़े स्तर पर लैंड यूज को लेकर दलाल सक्रिय होने और इसके बदले मोटी रकम वसूलने के मामले उभर कर आए। इससे पूर्व राज्य सरकार ने बड़े स्तर पर कृषि भूमि का उपयोग बदला।
जेडीए के अनुसार चार साल में 35 हजार बीघा जमीन की 90-बी और 20 हजार बीघा भू-परिवर्तन का आंकड़ा सामने आने से नगरीय विकास विभाग के अफसरों में भी हड़कंप मचा हुआ है। सबसे ज्यादा भूउपयोग परिवर्तन और भूरूपांतरण अजमेर रोड, जगतपुरा, सीकर रोड, कालवाड़ रोड, आगरा रोड, टोंक रोड समेत एक दर्जन इलाकों में हुआ है।
क्या है 90-बी
नगरीय क्षेत्र में कृषि भूमि का अकृषि प्रयोजनार्थ रूपांतरण किया जाना होता है। राज्स्थान भूराजस्व अधिनियम 1956 की धारा 90-बी में कृषि भूमि का रूपांतरण व्यावसायिक, आवासीय या संस्थानिक में किया जाता है। जयपुर और प्रदेश के अन्य शहरों में अब 90-बी प्रक्रिया तो आसान है, लेकिन किसान की ओर से प्रार्थना पत्र दिए जाने के बाद फाइल अटकी रहती है। अफसर की मर्जी होने पर ही फाइल क्लियर होती है।
जेडीए में अटके हैं सैकड़ों मामले
जेडीए में अब भी सैकड़ों मामले 90-बी के लिए लंबित हैं। कई मामले तो तीन-तीन साल से लंबित हैं। जेडीए अफसरों से बात की गई तो उन्होंने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि प्रक्रिया पूरी नहीं है।