सीकर.
यदि इरादे बुलंद हों तो कुछ मुश्किल नहीं होता है। लक्ष्मणगढ़ के बीदसर गांव की सुभिता रेवाड़ ने इसे सच कर दिखाया है। सुभिता ने गुरुवार रात को लड़के को जन्म दिया और शुक्रवार सुबह सात बजे बीएड का एग्जाम देने पहुंच गई।
हालांकि कमजोरी के कारण उसे लेटकर एग्जाम देना पड़ा। कॉलेज प्रशासन ने भी सुभिता की मदद की और अलग कमरे में उसके एग्जाम की व्यवस्था करवाई। इस फैसले में पति राजेंद्र रेवाड़ सहित पूरे परिवार ने साथ देते हुए उसे प्रेरित किया।
सुभिता ने बताया कि गुरुवार रात को डिलीवरी के समय भी उसे पेपर की चिंता थी, लेकिन मेरे पति व परिवार ने भावनाओं को समझते हुए साथ दिया और एग्जाम के लिए डॉक्टर व प्रिंसिपल से बात की।’
सुभिता के पति राजेंद्र ने बताया कि सुभिता शुरू से ही हिम्मतवाली है। परिवार में कई बार ऐसे मौके आए जब मैं घबरा गया, ऐसे में सुभिता ने ही मुझे हिम्मत बंधाई। राजेंद्र सेना में कार्यरत हैं। फिलहाल उनकी पोस्टिंग मणिपुर में है। वे छुट्टी पर आए हुए थे। शुक्रवार को वे वापस ड्यूटी के लिए रवाना हो गए।