न्यूयॉर्क.
बचपन में स्तनपान से वंचित बालिकाओं की अपेक्षा स्तनपान की हुई बालिकाओं के बड़े होने पर उनमें स्तन कैंसर की आशंका कम होती है। हालांकि, यदि वे मां की पहली संतान हों तो यह बात लागू नहीं होती।
स्वास्थ्य संबंधी जर्नल इपिडेमियोलॉजी के मुताबिक महिला के जन्म का क्रम, जन्म के समय उसकी मां की उम्र और स्तनपान करने या न करने के आधार पर स्तन कैंसर होने की आशंका पर मैडिसन स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ विस्कोंसिन के हैजल बी. निकोलस और उनके साथियों द्वारा किए अध्ययन में यह बात सामने आई। अध्ययन के मुताबिक स्तन कैंसर का मां के दूध में मौजूद वातावरण के प्रदूषित तत्वों की मात्रा से संबंध होता है।
निकोलस ने बताया कि जिन महिलाओं ने बचपन में अपनी मां का दूध पीया था, उनमें स्तन कैंसर की आशंका 17 फीसदी कम पाई गई, लेकिन अपनी मां की पहली संतान होने की स्थिति में खतरे में कमी होने के कोई संकेत नहीं मिले।
निकोलस ने कहा कि बचपन में स्तनपान करने के आधार पर स्तन कैंसर के जोखिम में अंतर हो सकता है। इसलिए इन संबंधों के स्तनपान की अवधि या मां के दूध में मौजूद वातावरण के प्रदूषक तत्वों के संबंध का और अध्ययन करने की जरूरत है।