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इंडियन चट कर जाते हैं 2000 करोड़ का सॉस

चंडीगढ़दो दशक पहले भारत में ब्रांडेड टोमैटो सॉस यानी टमाटर की चटनी का कारोबार शुरू हुआ था। उसके बाद भारतीयों को इसकी ऐसी आदत लगी कि वह हर साल 1800 से दो हजार करोड़ रुपए की टोमैटो सॉस खा जाते हैं। इमली की देसी चटनी ब्रांडेड नहीं हो पाने के कारण तेजी से गायब होती जा रही है। लोगों की खानपान संबंधी आदतों में तेजी से बदलाव के कारण बोतलबंद सॉस की बिक्री तेजी से बढ़ रही है।

चटनियां और अचार बनाने वाली कंपनी टॉप्स के सेल्स एंड मॉर्केटिंग प्रेसीडेंट परमिंदर सिंह संधू का कहना है कि टोमैटो सॉस का कारोबार हर साल 15-20 फीसदी की दर से बढ़ रहा है। आने वाले दिनों में यह 30 फीसदी वार्षिक दर से बढ़ सकती है। कंपनियों के सामने मांग पूरी करने के लिए टमाटर का संकट खड़ा हो गया है।

कच्चे माल का आयात : ब्रांडेड एवं पैक्ड फूड का कारोबार बढ़ रहा है। इसी के साथ सॉस की बिक्री बढ़ रही है। मांग पूरी करने के लिए कच्च माल चीन और अन्य देशों से मंगाना पड़ रहा है।

अचार का बाजार भी ब्रांडेड

ब्रांडेड अचार का बाजार भी कुलांचे भर रहा है। आम भारतीय घरों में बनने वाला अचार अब सुपर मार्केट की शेल्फ से ही आने लगा है। संधू कहते हैं, भारतीयों की आदत अचार बाजार को बढ़ा रही है। कंपनियां नए-नए अचार ला रही हैं। टॉप्स भी आम, नींबू के अलावा दर्जन भर किस्म के अचार बनाती है और हर महीने एक-आध नई वेरायटी इसमें जोड़ी जाती है।





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