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मां तुझे सलाम

आज मदर्स डे है नमन है कुछ ऐसी मांओं को जिन्होंने खुद अपना मकाम बनाते हुए अपने बच्चों को भी दुनिया में कुछ अलग बनाने का प्रण किया। इनमें से कुछ सिंगल मदर्स हैं तो कुछ ने सिर्फ अपने कामों से अपने ही दम पर दुनिया की तमाम मदर्स को एक सूत्र में बांधने का बीड़ा उठाया है।

मेनका गांधी

मेनका और उनका बेटा वरुण नेहरू-गांधी परिवार से ताल्लुक रखते हैं। वरुण को कई मायनों में आधुनिक युवा पीढ़ी से अलग कहा जा सकता है। वह न सिर्फ उच्च शिक्षित हैं, बल्कि एक अच्छे कवि और बेहतरीन वक्ता भी हैं। वरुण के लिए यह सब अर्जित करना आसान नहीं था, क्योंकि उनकी पशु प्रेमी मां मेनका गांधी उनकी सिंगल पैरेंटिंग करने के साथ ही राजनीतिक जिम्मेदारी भी निभा रही थीं। मेनका ने राजनीति भी अपने दम पर की, इसलिए वरुण के पास मां पर फख्र करने की कई वजह हैं।

बीजेपी की नई पीढ़ी का यह नेता फिलहाल पार्टी की युवा ब्रिगेड के लिए प्रेरणास्रोत है। वरुण ने अभी तक राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश मुद्दों पर लिखा है। वह आरएसएस के मुख पत्र ‘सामना’ के लिए भी लिख चुके हैं। उनकी किताब ‘द अदरनेस ऑफ सेल्फ’ बेस्ट सेलर रही है। अभिव्यक्ति की यह विरासत उन्हें अपनी मां से मिली है। 28 वर्षीय वरुण के लिए मां मेनका सही रोल अदा करते हुए 2009 के संभावित संसदीय चुनाव में संभवत: पीलीभीत के अपने चुनाव क्षेत्र को छोड़ सकती हैं।

कोकिला बेन अंबानी

इन्हें मॉडर्न इंडियन इंडस्ट्रीज की मां कहा जा सकता है। कोकिला बेन ने रिलायंस समूह का गठन भले ही न किया हो लेकिन इसे आगे बढ़ाने में उनका भी काफी योगदान है। एक समय पति को व्यापार बढ़ाने के दौरान संबल देने वाली कोकिला ने धीरूभाई के बीमार पड़ने और सरकारी दबावों के दौरान भी मोर्चा संभाले रखा। धीरूभाई के न रहने और बेटों में आई दरार के मुद्दे पर भी उन्होंने एक मां की जिम्मेदारी का बखूबी निर्वहन किया। मुकेश और अनिल को काफी हद तक बराबरी की हिस्सेदारी दी। वसीयत की गैर मौजूदगी में कोकिला बेन ने पति का मान रखने का भी हौसला दिखाया। साधारण जीवन जीकर कोकिला बेन ने बहू रूपी बेटियों नीता और टीना को भी समाज के लिए कुछ करने का रास्ता दिखाया है।

लीला भंसाली

फिल्मकार संजय लीला भंसाली का नाम किसी पहचान का मोहताज नहीं, लेकिन इस नाम को वक्त के थपेड़ों के साथ जगह बनाने में काफी वक्त लगा। जैसा कि कहा जाता है कि हर सफल व्यक्ति के पीछे किसी न किसी महिला का हाथ होता है, उसी तरह संजय के पीछे उनकी मां का संबल था। इसीलिए संजय अपने नाम और सरनेम के बीच में मां का नाम लीला लगाते हैं। यह मां को नमन करने का उनका तरीका है। ‘खामोशी’ से लेकर ‘सावरिया’ तक फिल्में बनाने वाले संजय को लीला ने बहुत पहले बता दिया था कि ख्वाब तुम्हारे हैं और दु:स्वप्न मेरे हैं।

संजय आज तक इसी सीख पर चल रहे हैं। कम लोग ही जानते होंगे कि एसएलबी के नाम से मशहूर संजय के अपने पिता से अच्छे संबंध नहीं रहे। इसके बावजूद उन्होंने अपनी हर फिल्म माता-पिता को समर्पित की। ‘खामोशी’ में सीमा विश्वास का घर-घर जाकर सामान बेचना, ‘देवदास’ में पारो क ी मां का गरीबी में भी हौसला बनाए रखना उनकी अपनी मां को आदरांजलि ही तो है।

रेणुका चौधरी

रेणुका चौधरी को जानने वाले उन्हें तेज तर्रार महिला नेत्री कहते हैं, यह काफी हद तक सही भी है। लेकिन दहेज पीड़ित महिलाओं के लिए रेणुका ने सराहनीय कार्य किया है। उन्होंने दो वर्ष पहले डोमेस्टिक वॉयलेंस लॉ को लागू कराने में एड़ी-चोटी का जोर लगाया और काम पूरा करके ही दम लिया। वैसे कुछ लोगों का यह मानना है कि वुमेन एंड चाइल्ड वेलफेयर मिनिस्टर ने यह काम अपने पारिवारिक कारणों से किया। उन्होंने अपनी बेटी पूजिता के ससुराल वालों के खिलाफ इस एक्ट का बखूबी इस्तेमाल किया। कुछ भी हो, इस एक्ट के चलते रेणुका ने अपनी बेटी की मां बतौर ही नहीं, देशभर की बेटियों की मां के तौर पर ख्याति अर्जित की है।

तुम्हारे न होने पर..

कुछ लोगों के लिए मां ताउम्र संबल और हौसले की मिसाल रही हैं तो पत्रकार बरखा दत्त को मां अपने न रहने के बाद भी जिंदगी का मकसद दे गईं। युवा भारत की रोल मॉडल बरखा दत्त की मां प्रभा दत्त भी पेशे से पत्रकार थीं और नामी अखबार समूह से जुड़ी रहीं। उन्होंने अपने अखबार से अनुमति न मिलने के बावजूद 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध की रिपरेटिंग की। रिपोर्ट इतनी अच्छी थीं कि संपादक को मजबूरी में छापनी पड़ीं। इसे कुदरत ही कहेंगे कि उभरते हुए कैरियर और भरे-पूरे परिवार के बावजूद वे अल्प आयु में ही ब्रेन हेमरेज का शिकार हुईं।

किरण बेदी

देश की पहली महिला आईपीएस अधिकारी किरण बेदी की बेटी होना साइना एक उपलब्धि मानती हैं। लेकिन उनका कहना है कि आपको अपने कामों से उनकी बेटी होना साबित करना पड़ता है। उनकी बेटी होने का अर्थ है ईमानदारी, हौसला और देश भक्ति। साइना युवा एक्टिविस्ट हैं, उन्होंने बतौर समाज सेवक अपनी एक अलग जगह बनाई है। इसके अलावा वह टीवी निर्माता भी हैं। चूंकि जीवन की नींव ही मां से पड़ती है, इसलिए सामाजिक सरोकारों की तरफ जाने का श्रेय वह किरण बेदी की संस्था इंडिया विजन फॉउंडेशन को देती हैं। साइना ने आज अपना खुद का एनजीओ पवित्रता फॉउंडेशन भी बनाया है।





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CMJHA
Sunday, 11th May 2008, 16:37
Mother is path of life every childs