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Chandigarh Chandigarh चंडीगढ़.महंगाई की मार आम उपभोक्ताओं पर ही नहीं पीयू हॉस्टलों में रहने वाले स्टूडेंट्स पर भी पड़ रही है। हालत यह है कि अब उनकी प्लेट में आए परांठे का साइज छोटा और पतला हो गया है। वहीं ब्रेड-बटर में बटर कम हो गया है। ऑमलेट मिल तो रहा है लेकिन प्याज कम हो गया है। यह तो ब्रेकफास्ट की बात लेकिन लंच और डिनर में भी थाली छोटी होती जा रही है। रोटी का साइज या क्वालिटी कम हुई है।
पीयू स्टूडेंट्स सेंटर में भी खाने की सभी चीजों की क्वालिटी में भले ही फर्क न पड़ा हो लेकिन क्वांटिटी यानी मात्रा बेहद कम हो गई है। थाली में पहले जितनी सामग्री परोसी जाती थी उससे एक बार में पेट की पूर्ति हो जाती थी लेकिन अब आधा पेट ही भर पाता है।
मालूम हो वर्ष 2003 से पीयू ने रेट नहीं बढ़ाए हैं लेकिन महंगाई लगभग 30 से 40 फीसदी बढ़ चुकी है। पीयू के 13 ब्वॉयज और हॉस्टलों में करीबन 4200 स्टूडेंट्स के अलावा वुमन वर्किग हॉस्टल में स्टूडेंट्स रहते हैं।
इन सब हॉस्टलों और स्टूडेंट्स सेंटर पर 2003 में आखिरी बार रेट बदले गए थे लेकिन इन 5 सालों में महंगाई कई गुणा बढ़ चुकी है। इसके चलते दुकानदार रेट न बढ़ाने की मजबूरी में खाने की चीजों की मात्रा को कम कर रहे हैं। स्टूडेंट्स भी मानते हैं कि महंगाई बढ़ने से यह सब हुआ है।
अब हॉस्टल के मैस और कैंटीन ठेकेदार इस रेट पर सामान बेचना नुकसान का सौदा मानते हैं। उनके लिए पुराने रेट पर बेचना मुश्किल हो रहा है लेकिन स्टूडेंट्स को पेट भरने के लिए पूरा खाना चाहिए। लिहाजा, अब पीयू के हॉस्टलों के मैस व कैंटीन के ठेकेदार भी पीयू प्रशासन से रेट रिवाइज करने के लिए आग्रह कर रहे हैं।
महंगाई बढ़ने से क्वालिटी प्रभावित हुई है और क्वांटिटी भी। हॉस्टलों में और बाहर हर जगह क्वांटिटी कम हुई है।
-अर्शदीप सिंह काहलों, हॉस्टलर, यह हाल हॉस्टलों का ही नहीं डिपार्टमेंट की कैंटीन का भी है। वहां तो चाय भी कम हो गई है और समोसे भी छोटे हो चुके हैं। -पंकज चौधरी, हॉस्टलर, पीयू
पहले 3 परांठे ब्रेकफास्ट में काफी होते थे लेकिन अब कम पड़ते हैं। ब्रेड-बटर में मक्खन भी कम हो गया है। सुपिंदर, पीयू हॉस्टलर
स्टूडेंट सेंटर पर मिलने वाले खाने में भी कमी आई है। राजमाह-चावल की मात्रा कम हो गई है। यही हाल जूस और शेक का है।
अवतार, पीयू हॉस्टलर
पीयू मैस और कैंटीन के अलावा स्टूडेंट्स सेंटर की दुकानों से कई बार रेट बढ़ाने का आग्रह आ चुका है। पिछले 5 साल से रेट नहीं बढ़े हैं और महंगाई काफी बढ़ गई है। स्टूडेंट्स भी समझते हैं कि यह प्राब्लम क्यों है लेकिन या तो क्वांटिटी से समझौता करना पड़ेगा या मामूली बढ़ोतरी को झेलना होगा क्योंकि हॉस्टलों में मैस चलाने वाले भी चाहिएं।
-प्रो. नवल किशोर, डीएसडब्ल्यू, पीयू