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उल्टी-दस्त से तीन बच्चों की मौत

फरीदाबादउल्टी-दस्त और बुखार से पिछले तीन दिन में तीन बच्चों की मौत हो गई है। इन बच्चों की मौत अलग-अलग निजी अस्पतालों में हुई। इन अस्पतालों ने स्वास्थ्य विभाग को इस बारे में जानकारी दे दी है। जवाहर कॉलोनी निवासी दो साल की नेहा, एसी नगर निवासी 5 साल के सनी और एसजीएम नगर निवासी डेढ़ साल के मन्नू को उल्टी-दस्त और बुखार की शिकायत के बाद अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया था, जहां उनकी मौत हो गई।

इन अस्पतालों ने बच्चों की मौत के बारे में आईडीएसपी के तहत स्वास्थ्य विभाग को रिपोर्ट की है। इन बच्चों की मौत के साथ ही इस मौसम में डायरिया से मरने वालों की संख्या दस हो गई है। इससे पहले पिछले महीने डायरिया से सात बच्चों की मौत हो गई थी। डायरिया का सबसे ज्यादा असर कॉलोनियों और स्लम बस्तियों में है। तीन बच्चों की मौत के अलावा विभिन्न अस्पतालों में डायरिया से पीड़ित बच्चे भारी तादाद में भर्ती हैं।

बादशाह खान अस्पताल में भर्ती किए जाने वाले डायरिया पीड़ित बच्चों की संख्या लगातार बढ़ रही है। विभिन्न निजी अस्पतालों में भी डायरिया से पीड़ित मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। ईएसआई अस्पतालों में पिछले चार दिनों में डायरिया से पीड़ित दर्जनों बच्चे भर्ती किए गए हैं। डॉक्टरों ने डायरिया से मौत का कारण लापरवाही बरतना बताया है।

बादशाह खान अस्पताल के फिजिशियन डॉ. एसके मनोचा के अनुसार स्लम बस्तियों और कॉलोनियों में रहने वाले ज्यादातर लोग डायरिया हो जाने के स्थिति में नीम हकीमों के चंगुल में फंस जाते हैं और जब मरीज की स्थिति ज्यादा गंभीर हो जाती है तो सरकारी या किसी निजी अस्पताल की तरफ भागते हैं। ऐसे में मरीज को बचा पाना संभव नहीं हो पाता।

सिविल सर्जन ने की सावधान रहने की अपील

सिविल सर्जन डॉ. रविन्द्र माथुर ने लोगों को जल जनित बीमारियों से सावधान रहने की अपील की है। अपने कार्यालय में बुलाई गई प्रेस कांफ्रेंस में उन्होंने कहा कि थोड़ी सी सावधानी बरतने से डायरिया और अन्य जल जनित बीमारियों से बचा जा सकता है। उन्होंने कहा कि शहर के ज्यादातर हिस्सों में पानी पीने लायक नहीं आ रहा है। ऐसी स्थिति में पानी को उबाल कर पीना चाहिए। उन्होंने लोगों से रेहड़ियों और खोमचों पर बिकने वाली खाने-पीने की चीजें, फलों का जूस, गन्ने रस, बर्फ, कटे फल आदि न खाने की भी अपील की।





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