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मप्र को नहीं चाहिए मदद!

भोपाल. क्या मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य सेवाएं इतनी पर्याप्त हैं कि उनके विकास के लिए अब किसी मदद की जरूरत नहीं रह गई है? यह सवाल इसलिए उठा है क्योंकि राज्य सरकार ने केंद्र द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए दी जाने वाली करोड़ों की मदद के प्रस्ताव को कोई तवज्जो नहीं दी है। जबकि अन्य राज्यों ने इस योजना का लाभ उठाने में कोई समय नहीं गंवाया है।

केंद्र ने सभी राज्यों में लागू केंद्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य अभियान (एनआरएचएम) के तहत आयुर्वेद, यूनानी, सिद्धा और होम्यापैथी चिकित्सा पद्धतियों (आयुष) के लिए उक्त राशि का प्रावधान किया था। मकसद है कि उन ग्रामीण क्षेत्रों में भी आयुष की मदद से इलाज की व्यवस्था की जा सके, जहां एलोपैथी के डाक्टरों तथा संसाधनों की कमी है।

एनआरएचएम के तहत 30 करोड़ की राशि केवल मप्र के लिए मिल सकती थी, पर राज्य ने राशि मांगी ही नहीं। हालांकि आयुष संचालनालय ने स्वास्थ्य विभाग को इस योजना के तहत वर्ष 2007-08 और 2008-09 के लिए प्रोजेक्ट इम्प्लीमेंट प्लान (पीआईपी) बनाकर भेज दिए हैं, लेकिन विभाग ने इस पर कार्रवाई करने में कोई रुचि नहीं दिखाई।

एनआरएचएम के कार्यक्रम क्रियान्वयन योजना में स्पष्ट लिखा ह कि भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों का विश्वास आयुष पद्धतियों पर है। इसलिए इस माध्यम से लोगों तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाई जाएं। आयुष के संचालक उमेश मूंदडा का कहना है कि हमारे द्वारा प्रोजेक्ट इंप्लीमेंट प्लान राज्य सरकार को भेजा गया है। वहीं से केंद को भेजा जाएगा।

एनआरएचएम के तहत प्रस्तावित बजट के बारे में मुझे अभी पूरी जानकारी नहीं है। एनआरएचएम, आरसीएच के संयुक्त संचालक डा. एसके श्रीवास्तव के मुताबिक यह सच है कि आयुष की मदद से हम गावों में स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच को गहरा कर पाएंगे।

आयुष के लिए भारत सरकार के द्वारा ही सभी प्रक्रियाएं होनी हैं। एनआरएचएम के तहत होने वाली सभी योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए भी आयुष संचनालय द्वारा कार्ययोजना सीधे भारत सरकार को भेजी जानी चाहिए।





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