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लाख की कार,दो लाख की पार्किग!

भोपाल. शहर की सड़कों पर दनदनाती कारें जमीन के लिए भारी पड़ रही हैं। पार्किग के लिए करीब 70 हजार कारें रोजाना लगभग साढ़े पांच अरब रुपए मूल्य की जमीन घेरती हैं। अगर एक लाख की नैनो कार का आकलन किया जाए तो पॉश इलाके में उसके लिए दोगुने मूल्य की जमीन की व्यवस्था करनी होगी।

हाल ही में सेंटर फार साइंस एंड एनवायरमेंट की एक सर्वे रिपोर्ट आई थी जिसमें कहा गया था कि दिल्ली में एक कार रोजाना औसतन दो घंटे ही चलती है, बाकी समय वह महंगी जमीन पर पार्क रहती है। भास्कर ने शहर में कारों के पार्किग से जुड़े आंकड़ों का विश्लेषण किया तो कई रोचक बातें सामने आईं।

आरटीओ के अनुसार भोपाल में साढ़े पांच लाख पंजीकृत वाहन हैं। इनमें कारों की संख्या लगभग 70 हजार है। जिस गति से वाहनों की संख्या बढ़ रही है, उससे पार्किग की समस्या भी खड़ी होने लगी है। रिहायशी इलाकों में अधिकतर ने मकान के अंदर ही पार्किग की व्यवस्था कर रखी है तो कुछ घर के सामने सड़क पर ही पार्क करते हैं। व्यावसायिक क्षेत्रों में तो समस्या और गंभीर है।

नेशनल बिल्डिंग कोड के अनुसार एक कार पार्क करने में बेसमेंट में न्यूनतम 3.25 वर्गमीटर जगह की जरूरत रहती है। भोपाल में मौजूद 70 हजार कारें प्रति कार 3.25 वर्गमीटर के हिसाब से दो लाख 27 हजार वर्गमीटर जमीन पर खड़ी रहती हैं।

जमीन की दरों की सरकारी गाइड लाइन के अनुसार यदि औसत 25 हजार रुपए प्रति वर्गमीटर की दर से हिसाब लगाया जाए तो इतनी जमीन की कीमत पांच अरब 68 लाख रुपए होगी। मालवीय नगर, न्यू मार्केट में औसत मूल्य 65 हजार रुपए वर्गमीटर के हिसाब से एक कार दो लाख से ज्यादा कीमत की जगह घेरेगी। वैसे जमीन की वास्तविक कीमतें इससे ज्यादा हो सकती हैं।

>> पार्किग को लेकर जिस तरह की स्थितियां निर्मित हो रही हैं, उसको देखते हुए कार व अन्य वाहनों के रजिस्ट्रेशन के वक्त यह पूछना पड़ेगा कि पार्क करने की जगह है या नहीं।
दिनेश जैन, आरटीओ





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