इंदौर. शहर में एक सरकारी स्कूल ऐसा भी है जहां शिक्षक छुट्टियां एक तरफ रख छात्राओं को रोजगार का पाठ पढ़ाने में लगे हैं। यहां की छात्राएं पढ़ाई के साथ कमाई करना सीख र्गई। उन्हें देखकर स्कूल के आस-पास रहने वाली कॉलेज की छात्राओं सहित गृहिणियों ने भी स्कूल में आना शुरू कर दिया।
जहां निजी स्कूल इन दिनों समर कैम्प लगा रहे हैं वहीं शासकीय माध्यमिक विद्यालय क्र. 51, कुलकर्णी भट्टा में नए प्रयोग चल रहे हैं। यहां स्कूल की जनशिक्षा प्रभारी, जनशिक्षक व स्कूल के पूरे स्टाफ ने गर्मियों में भी स्कूल खोलने का निर्णय लिया। 2 मई से लगे इस कैम्प में स्कूल की छात्राओं को रोजगार के ऐसे काम सिखाए जा रहे हैं जिनसे वे पैरों पर खड़े हो सकें।
इसमें मेंहदी लगाना, सिलाई-कढ़ाई, पेंटिंग, कम्प्यूटर सीखना, खिलौने बनाने की ट्रेनिंग दी जा रही है। ट्रेनिंग के कुछ दिन बाद छात्राओं ने रोजगार का हुनर सीखकर बाजार में हाथ जमाना शुरू कर दिया है। छात्रा मेघा सेन ने बताया कि छात्राएं उत्पाद बेचकर रोज 50 से 200 रु. तक कमा रही हैं। छात्रा रीना जैन का कहना है कि उन्हें मेंहदी रचाना यहां से सीखी और वे फिलहाल तीन शादियों में दुल्हन को लगा चुकी हैं जहां उन्हें 700 रुपए मिले।
इसलिए लिया निर्णय
जनशिक्षा प्रभारी श्रीमती तंवर का कहना है कुलकर्णी भट्टा में अधिकांश गरीब परिवार रहते हैं जहां छात्राओं को ज्यादा नहीं पढ़ाया जाता। यहां के बच्चे काम पर जाकर कुछ न कुछ कमा लेते हैं मगर छात्राएं घर में बैठकर घुटन महसूस करती हैं इसलिए रोजगार कैम्प खोला है।
बेटी के साथ मां भी पहुंची
छात्राओं के पैसा कमाने के हुनर को देखकर स्कूल में कुछ छात्राओं के साथ उनकी मां भी ट्रेनिंग लेने आ रही हैं। वहीं ट्रेनिंग लेने वालों में कॉलेज की छात्राएं भी शामिल हो गईं। इस तरह कुल 250 छात्राएं और महिलाएं नए कामों में हाथ आजमा रही हैं। गृहणी प्रतिभा शर्मा का कहना है उन्होंने बेटी को काम करते देखा तो उन्हें भी लगा घर बैठे यह अच्छा काम है इसलिए उन्होंने भी सीखना शुरू कर दिया।
खास बात है कि रोजगार कैम्प पूरी तरह से मुफ्त है। हालांकि यहां अन्य शासकीय व निजी स्कूलों की शिक्षिकाएं भी मुफ्त में सेवा दे रही हैं। काम सिखाने के लिए बाजार से ली जाने वाली सामग्री जनशिक्षा प्रभारी अनुलता तंवर और जनशिक्षक राजेंद्र आचार्य ने खुद के वेतन व जनसहयोग से खरीदी हैं।