इंदौर.
हाल ही में इंदौर के एक निजी अस्पताल में 22 साल के युवक को हृदयरोग के कारण भर्ती करवाया गया। वह ठीक तो हो गया लेकिन चिकित्सा जगत को चिंता में डाल गया। वहीं डब्लूएचओ की रिपोर्ट से इसकी पुष्टि होती है कि भारत में लगातार हृदयरोगियों की संख्या बढ़ रही है। इसमें भी 40 से कम उम्र वाले मरीजों की संख्या प्रति 1000 व्यक्ति पर 10-12 है। इंदौर में इस वर्ग के लगभग 30 हजार मरीज है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) की हाल ही में जारी रिपोर्ट के मुताबिक आने वाले दस साल में दुनिया के 60 फीसदी हृदयरोगी भारत के होंगे। यह आंकड़ा बाकी देशों की तुलना में तीन से चार गुना ज्यादा है। अब बात करें मध्यप्रदेश की तो अभी तक यहां कोई सर्वे नहीं हुआ है लेकिन कार्डियोलॉजी सोसायटी ऑफ इंडिया, इंदौर चैप्टर का अनुमान है कि हृदय रोग में मध्यप्रदेश का स्थान देशभर में सातवां-आठवां हो सकता है।
सोसायटी के अध्यक्ष डॉ. गिरीश कवठेकर के अनुसार भारत के शहरी इलाकों में कुल आबादी के 10-15 प्रतिशत लोग हृदय रोग से पीड़ित हैं। इंदौर सहित प्रदेश के चार बड़े शहर भी इसी श्रेणी में शामिल है। अंचल में यह आंकड़ा 8-10 प्रतिशत है। कार्डियाक सर्जन डॉ. मनीष पोरवाल बताते हैं इंदौर के आसपास के छोटे कस्बों और शहरों में भी मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इसे अरबनाइजेशन एफेक्ट कहते हैं।
संकट बढ़ रहा है
कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अलकेश जैन बताते हैं इंदौर में हृदयरोगियों की संख्या लगभग तीन लाख हैं। इसमें से लगभग 30 हजार मरीज 25 से 40 साल के बीच के हैं।
डॉ. कवठेकर के मुताबिक कोलेस्ट्रॉल हृदय रोग के लिए कितना प्रतिशत जिम्मेदार है यह नहीं बताया जा सकता है। अन्य कारण भी समान रूप से जिम्मेदार है। इसमें से कई कारक तो ऐसे हैं जिनका हृदय पर क्या असर डालते हैं उसका खुलासा पूरी तरह नहीं हो पाया है।