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Madhya Pradesh
Gwalior Gwalior शिवपुरी. गड़रिया डकैत गिरोह के डर से बंद किए गए क्षेत्र के पाड़रखेड़ा रेलवे स्टेशन फिर से शुरू करने की तैयारी की जा रही है। इस स्टेशन के खुल जाने से इस रेल लाइन पर यात्रा करने वाले यात्रियों के पूरे दो घंटे बचेंगे। हालांकि स्टेशन खुलने के आदेश अभी रेल मंत्रालय से नहीं आए हैं, लेकिन रेलने के अधिकृत सूत्र इस बात की पुष्टि कर रहे हैं। वर्ष 2005 में क्षेत्र में रामबाबू-दयाराम गड़रिया गिरोह का आतंक था तब शिवपुरी से करीब 34 किलोमीटर ग्वालियर लाइन पर बने इस रेलवे स्टेशन को यात्रियों के लिए बंद कर दिया था।
जब से आज तक इस रेलवे लाइन के यात्री परेशान हैं और उस दिन को कोषते रहते हैं, जब इसे बंद कर दिया था । हालांकि क्षेत्र के कुछ लोग मानते हैं कि इस स्टेशन को बंद कराने में रेलवे के कुछ स्थानीय कर्मचारियों की साजिश थी, उनका मानना है कि रेलवे कर्मचारियों को डकैत गिरोह बिल्कुल परेशान नहीं करता था।
क्यों बंद किया गया था यह ?
रेलरे सूत्रों का कहना है कि करीब तीन साल पहले नवम्बर 2005 में इस लाइन पर तैनात एक रेलवे इंजीनियर ज्ञानेन्द्र परमार का गड़रिया गिरोह द्वारा अपहरण कर लिया था और करीब डेढ़ महीने बाद इसे मोटी रकम लेकर ही आजाद किया था।
इस दहशत से पाड़रखेड़ा स्टेशन पर काम करने वाले रेलवे के सहायक स्टेशन मास्टर एवं अन्य क र्मचारियों ने यहां काम करने से मना कर दिया था। रेलवे के इस स्टाफ का यह भी कहना था कि यहां डच्यूटी देने वाले स्टाफ से गड़रिया गिरोह के सदस्य खाना बनवाते और अपने कपड़े धोने पर मजबूर करते हैं। साथ न करने पर उठा ले जाने की धमकी देते हैं।
बढ़ गई थी यात्रियों की परेशानियां
इस रेलवे स्टेशन के बंद होते ही ग्वालियर से गुना, इंदौर जाने वाले यात्रियों की तमाम परेशानियां बढ़ गई थी और यहां से रेल से आने-जाने वाले लोगों की संख्या लगातार कम होती चली गई, जो आज तक कम होती जा रही है और जो यात्रा शिवपुरी से ग्वालियर तक महज 21 रुपए में हो जाती है, उसी के लिए लोग 62 रुपए खर्च करने को तैयार रहते हैं।
60 किलोमीटर की यात्रा में बचेंगे 2 घंटे
रेलवे से जुड़े सूत्रों का कहना है कि इस स्टेशन के शुरू हो जाने से यात्रियों का पूरा दो घंटे का समय बचेगा, क्योंकि पाड़रखेड़ा स्टेशन बंद होने के कारण पैसेंजर गाड़ी को मोहना स्टेशन पर तब तक खड़ा रहना पड़ता है, जब तक कि गुना से आने वाली पैसेंजर गाड़ी शिवपुरी से मोहना तक नहीं पहुंच जाती। इस 60 किलोमीटर की दूरी को रुकते-रुकते तय करने में गाड़ी को पूरे दो घंटे का समय लग जाता है।
क्या-क्या होगा नया
उत्तर-पश्चिम रेल प्रशासन को इस उजड़े स्टेशन को फिर से आबाद करने के लिए गाड़ी के लिए सिग्नल पाइंट, स्टेशन की इमारत का जीर्णोद्धार, खिड़की, दरवाजे की रिपेयरिंग समेत एक क्रासिंग स्टेशन तैयार करना होगा, ताकि गाड़ियों को क्रास किया जा सके। इसके अलावा यहां दो एएसएम, एक रेस्ट कीपर, तीन प्वाइंट्समैन समेत कुल आठ लोगों का स्टाफ रहेगा।