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आईआईटीटीएम तैयार करेगा कल्चरल गाइड्स

ग्वालियर. विदेशी पर्यटकों को भारत स्थित सभी विश्व धरोहरों के बारे में पूरी तरह जानकारी देने के लिए कल्चरल हैरीटेज स्पेशलिस्ट गाइड्स तैयार किए जाएंगे। इन गाइड्स को तैयार करने का काम यूनाइटेड नेशन एजूकेशनल साइंटिफिक कल्चरल ऑर्गनाइजेशन (यूनेस्को) व ग्वालियर स्थित भारतीय पर्यटन एवं यात्रा प्रबंधन संस्थान (आईआईटीटीएम) ने संयुक्त रूप से करेंगी।

मार्च 2010 तक चलने वाले इस कार्यक्रम में गाइड्स को धरोहरों व विभिन्न क्षेत्रों के इतिहास, महत्व के साथ-साथ वहां सांस्कृतिक गतिविधियों से अवगत कराया जाएगा, ताकि ये पर्यटकों को इस संबंध में विस्तार से बता सकें जिससे उनकी जिज्ञासाओं का समाधान हो सके।

आईआईटीटीएम व यूनेस्को के बीच इस संबंध में करार हो चुका है। देश में इस समय 27 विश्व धरोहर साइड्स हैं। इनमें से मप्र में सांची स्तूप, भीम बैठिका व खजुराहो विश्व धरोहर की सूची में शामिल हो चुके हैं। इनमें कुछ ऐसी साइडस हैं, जहां पर पर्यटकों को विशेषज्ञ गाइड्स नहीं मिलते।

इससे विदेशी पर्यटकों को पूरी-पूरी जानकारी नहीं मिल पाती। पर्यटकों को धरोहरों के महत्व तथा इतिहास से पूरी तरह परिचित कराने के उद्देश्य से ही यह करार किया गया है। यूनेस्को भारतीय संदर्भो को ध्यान में रखते हुए मूल शिक्षण सामग्री का निर्माण करेगी।

कल्चरल हैरीटेज स्पेशलिस्ट गाइड ट्रेनिंग मैनुअल का भारतीय संस्करण तैयार होगा। प्रशिक्षण के दौरान वर्कशाप व रिफ्रेशर कोर्स कराए जाएंगे तथा समापन पर गाइड्स को प्रमाण-पत्र दिया जाएगा। साझा कार्यक्रम के दौरान हर साल देश के विभिन्न जगहों में लगभग 500 गाइड्स को प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद यूनेस्को की वेबसाइट पर कल्चरल स्पेशलिस्ट गाइड्स के नाम भी डाले जाएंगे।

खर्च दोनों उठाएंगे
कार्यक्रम का खर्च दोनों संस्थान मिलकर वहन करेंगे। इसमें राष्ट्रीय व अन्तरराष्ट्रीय दानदाताओं से भी सहयोग लिया जाएगा। कल्चरल हैरीटेज गाइड्स तैयार करते समय दोनों संस्थाएं मानव अधिकारों का विशेष ध्यान रखेंगी। साझा कार्यक्रम के तहत यूनेस्को द्वारा प्रतिपादित सिद्धांतों का पालन किया जाएगा। बंधुआ मजदूरी, बाल मजदूरी न हो, इसका भी ध्यान रखा जाएगा।

>> यूनेस्को के साथ काम करने का पहला अवसर मिला है। करार होने के बाद हर साल लगभग 500 गाइड्स तैयार किए जाएंगे। यह काम देश भर में चलेगा। इस काम की सफलता के लिए संस्थान विशेष विशेषज्ञों की भी मदद लेगा और पाठ्य व प्रशिक्षण सामग्री भी तैयार की जाएगी। दोनों के बीच करार होने के बाद यूनेस्को के प्रोजेक्ट आफिसर कल्चरल शगुना गहीलोते ने अपनी स्वीकृति प्रदान कर दी है।
प्रो.सितिकंठ मिश्रा, निदेशक आईआईटीटीएम





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