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रावघाट रेललाइन पर तलवारें खिंचीं

रायपुर. line भारत सरकार के वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के पास रावघाट रेललाइन पर रेलवे स्टेशन और स्टाफ क्वार्टर्स बनाने का प्रस्ताव लंबित है। भारत सरकार ने अब तक केवल रेललाइन बिछाने की अनुमति दी है। मुख्य सचिव शिवराज सिंह ने कहा कि रेलवे स्टेशन और स्टाफ क्वार्टर्स बनाने के लिए राज्य शासन द्वारा कई बार केंद्र से आग्रह किया गया है, लेकिन केंद्र इस मामले में चुप्पी साधे हुए हैं।

रायपुर रेल मंडल के डीआरएम प्रेम चंद्रा ने बताया कि रेललाइन पर करीब 10 रेलवे स्टेशन प्रस्तावित हैं। हर स्टेशन पर कम से कम 10 स्टाफ क्वार्टर्स बनेंगे। कुछ में ज्यादा संभावित हैं। रेलवे स्टेशन और स्टाफ क्वार्टर्स के मामले में ही केंद्र और राज्य के बीच विवाद बढ़ा है। जबकि इस प्रोजेक्ट के लिए 11 दिसंबर 07 को नए सिरे से एमओयू किया गया है।

करीब 968 करोड़ की इस रेल परियोजना पर राज्य शासन, रेलवे, सेल और एनएमडीसी के बीच दिल्ली में 11 दिसंबर 07 को नए सिरे से एमओयू हो चुका है। 235 किलोमीटर रेल लाइन का निर्माण दो चरणों में किया जाएगा। दल्लीराजहरा से रावघाट तक 95 किलोमीटर रेललाइन पहले चरण में बनाई जाएगी।

दूसरे चरण में रावघाट से कोंडागांव होते हुए जगदलपुर तक 140 किलोमीटर रेललाइन का निर्माण किया जाएगा। प्रथम चरण की जमीन का खर्च रेलवे उठाएगा, लेकिन जमीन अधिग्रहण आदि की व्यवस्था राज्य शासन को करनी होगी। दूसरे चरण में जितनी भी सरकारी जमीन आएगी, वह राज्य की ओर से निशुल्क दी जाएगी।

तय शर्र्तो के अनुसार योजना के पहले चरण में सेल करीब 160 करोड़ रुपए लगाएगा। दूसरे चरण में एनएमडीसी करीब 75 करोड़ रुपए लगाएगा। प्रथम चरण का काम प्रारंभ करने के लिए सेल ने रेलवे को 30 करोड़ रुपए का भुगतान भी कर दिया है।

इस रेललाइन के लिए 2 अप्रैल 1998 को पहला एमओयू हुआ था, लेकिन फारेस्ट क्लियरेंस नहीं मिलने के कारण योजना पर काम ही शुरू नहीं हो पाया। उस समय योजना की अनुमानित लागत 300 करोड़ रुपए थी। अब यह बढ़कर करीब 968 करोड़ रुपए की हो गई है।

दल्लीराजहरा की खदानों का कच्च लोहा समाप्त होने को है, इस कारण बीएसपी के नियमित संचालन के लिए रावघाट की खदानों से कच्चा लोहा लाना पड़ेगा। इसके लिए इस रेललाइन की उपयोगिता काफी महत्वपूर्ण हो गई है।





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