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मिलने लगी एनटीपीसी सीपत से बिजली

बिलासपुर. एनटीपीसी, सीपत में विद्युत उत्पादन शुरू होने के बाद करार के मुताबिक छत्तीसगढ़ को उसके हिस्से की बिजली मिलने लगी है। यद्यपि सीपत की 500 मेगावाट की विद्युत इकाई से अभी औसतन 288 से 300 मेगावाट के करीब विद्युत उत्पादन हो रहा है, परंतु पूर्ण उत्पादन का 50 फीसदी भी उत्पादन होने की स्थिति में प्रदेश को 77 मेगावाट विद्युत आपूर्ति होने का अनुमान है।

एनटीपीसी के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर बी प्रधान ने ‘दैनिक भास्कर’ से बातचीत में इसकी पुष्टि की है। गौरतलब है कि एनटीपीसी, सीपत को विद्युत उत्पादन के लिए पानी देने के लिए राज्य शासन के साथ हुए समझौते के मुताबिक एनटीपीसी से छग को 154 मेगावाट विद्युत की आपूर्ति होनी है। परंतु यह करार 500 मेगावाट की एक यूनिट से पूर्ण उत्पादन प्राप्त होने की दशा के लिए है।

50 फीसदी उत्पादन होने पर प्रदेश का हिस्सा भी उसी अनुरूप विभाजित हो जाएगा। सीपत में मंगलवार से विद्युत उत्पादन प्रारंभ हो चुका है। 8 घंटे लगातार उत्पादन के बाद एक मर्तबा मशीन ट्रिप होने के बाद 14 घंटे के बाद दोबारा चालू की जा चुकी है। इसी प्रकार शुक्रवार को कुछ देर के लिए मशीन बंद की गई, परंतु बाद में उत्पादन चालू हो गया।

एनटीपीसी के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर का कहना है कि सीपत में विद्युत उत्पादन के साथ ही उत्पादित बिजली पश्चिम ग्रिड को प्रेषित की जा रही है। उत्पादन के साथ ही छत्तीसगढ़ को उसके हिस्से की बिजली प्रदाय की जा रही है। एनटीपीसी प्रबंधन के बयान पर सीएसईबी के एक आला अधिकारी ने पुष्टि की है।

बहरहाल सीपत में विद्युत उत्पादन के क्षेत्र में शनै: शनै: सारी बाधाएं दूर की जा रही हैं। प्रबंधन का कहना है कि सप्ताह भर में सीपत में विद्युत उत्पादन सुचारु हो जाएगा। शुक्रवार को वाल्व में खराबी की वजह से उत्पादन रोकना पड़ा था, परंतु सुधार के बाद शीघ्र ही मशीन पुन: प्रारंभ कर दी गई।

एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर के मुताबिक 500 मेगावाट की दूसरी यूनिट से उत्पादन प्रारंभ करने के लिए योजनाबद्ध ढंग से काम चालू किया जाएगा। इसके लिए पहली यूनिट से उत्पादन सुचारु होना जरूरी है। अनुमान है कि सप्ताह भर में उत्पादन सुचारु हो जाएगा।

पानी, कोयला फुल.
कोयला आधारित एनटीपीसी, सीपत की विद्युत परियोजना के लिए आवश्यक मात्रा में पानी व कोयला प्लांट में स्टाक कर लिया गया है। प्लांट की 3 पानी टंकियों में हसदेव बांगो बांध की नहर से लगातार पानी भरा जा रहा है। वहीं शनिवार की तिथि में 3 लाख टन कोयला सीपत में स्टाक किया गया है। 500 मेगावाट का पूर्ण उत्पादन होने की स्थिति में प्लांट में कोयले की प्रति दिन की खपत 8हजार टन बताई गई है।

कमर्शियल आपरेशन के बाद पूरी बिजली मिलेगी.
सीएसईबी के ट्रांसमिशन एंड डिस्टिब्यूशन, मेंबर वीके जैन ने ‘दैनिक भास्कर’ को दूरभाष पर बताया कि मंगलवार से चालू एनटीपीसी, सीपत में विद्युत उत्पादन के अंतर्गत रुक-रुक कर प्रदेश को बिजली मिलने लगी है। अब तक कितनी बिजली मिली, इसका लेखा-जोखा अभी नहीं बताया जा सकता।

उन्होंने बताया कि एनटीपीसी में कमर्शियल उत्पादन(500 मेगावाट) प्रारंभ होने पर प्रदेश को निर्धारित पूरी बिजली मिल सकेगी। इसमें 71 मेगावाट सीपत से तथा शेष 83 मेगावाट अन्य विद्युत इकाईयों से प्राप्त होगी। श्री जैन के मुताबिक प्रायोगिक उत्पादन के विद्युत की दर कमर्शियल की तुलना में कम होगी।





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