जयपुर. एसएमएस अस्पताल में दस साल से लगातार खराब हो रहा 5 हजार यूनिट कीमती प्लाज्मा अब बेकार नहीं जाएगा। इसके उपयोग के लिए अस्पताल को राज्य सरकार की ओर से हरी झंडी मिल गई है। अब अस्पताल प्रशासन ने प्लाज्मा से जीवनदायिनी दवाएं बनाने वाली कंपनियों से आवेदन मांगे हैं।
गौरतलब है कि लगभग दस साल पहले मुंबई के केईएम अस्पताल को प्लाज्मा देकर वहां से दवाइयां लेने की सुविधा बंद होने के बाद से एसएमएस अस्पताल में जमा हो रहे करीब 5 हजार यूनिट प्लाज्मा को सालभर बाद फेंकना मजबूरी बन गया था।
देशभर में प्लाज्मा के उपयोग से दवा बनाने की सुविधा नहीं होने से सभी सरकारी इकाइयां इसके लिए निजी ब्लड बैंकों और दवा कंपनियों पर निर्भर रहती हैं। इसकी स्वीकृति के लिए दो साल पहले राज्य सरकार के पास प्रस्ताव भेजा था।
इस बारे में भास्कर ने खबर प्रकाशित की थी। एसएमएस अस्पताल अधीक्षक डॉ. एनएस शेखावत के अनुसार स्वीकृति मिलते ही प्लाज्मा के उपयोग के लिए टेंडर निकाले गए हैं, जिन्हें अगले सप्ताह तक फाइनल कर दिया जाएगा।
खून में 55 प्रतिशत प्लाज्मा और 45 प्रतिशत रक्त कणिकाएं होती हैं। ब्लड डोनेशन के बाद इन्हें अलग कर लिया जाता है। एसएमएस में इन्हें सालभर तक सुरक्षित रखने की व्यवस्था है। समय रहते प्लाज्मा से गुर्दे की बीमारी, बर्न, हीमोफीलिया, ट्रोमा आदि के मरीजों के लिए दवा बनाई जाती है।