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धार्मिक मंत्रों की रिंगटोन का ज्योतिषीय प्रभाव

ज्योतिष विज्ञान. tones इन दिनों मोबाइल या डोर बैल में धार्मिक मंत्रों का रिंगटोन के रूप में इस्तेमाल बढ़ रहा है। बगैर यह जाने कि वह संबंधित व्यक्ति की राशि के लिए उपयुक्त भी हैं या नहीं। जरूरी है कि राशि के अनुरूप ही रिंगटोन या डोर बैल का चयन किया जाए। कारण, मंत्रों की मर्यादाएं होती है। समय, स्थान पर शुद्धता के साथ मंत्रों का उच्चरण हो इसका ध्यान न रख पाने से संबंधित व्यक्ति को विपरीत प्रभाव का भी सामना करना पड़ सकता है।

प्रत्येक मनुष्य के शरीर में तीन गुण विद्यमान हैं-सत्व्गुण, रज्गुण एवं तम गुण। इन तीनों गुणों की मात्रा का अनुपात कम या ज्यादा होने से ही प्रत्येक प्राणी में शारीरिक एवं मानसिक विविधताएं पाई जाती हैं। धार्मिक मंत्रों का प्रयोग करने से सत्व्गुण को बढ़ाया जा सकता है, जिसके फलस्वरूप व्यक्ति में नेक विचारों का समावेश होता है।

ऐसे में विभिन्न देवी-देवताओं के मंत्रों का सही समय पर सही प्रयोग करना आज के दौर में अवश्य फायदेमंद साबित हो सकता है। व्यक्ति के पास समयाभाव होने के कारण, आज वह विभिन्न धार्मिक मंत्रों की रिंगटोन/कॉलर टोन को अपने मोबाइल, डोर बैल एवं अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में उपयोग करने लगा है।

ज्योतिष के आधार पर देखा जाए तो अगर राशि के अनुसार सही रिंगटोन नहीं है तो मोबाइल आदि में धार्मिक मंत्रों की टोन रखने से फायदे कम नुकसान होने की संभावना अधिक है। कारण बहुत साफ है। प्रत्येक मंत्रों की अपनी मर्यादाएं होती हैं।

ऐसे में समय, स्थान पर शुद्धता के साथ मंत्रों का उच्चरण हो इसका ध्यान रिंगटोन के रुप में बजने वाले मंत्रों के साथ संभव नहीं हो पाता। किस समय मंत्र का उच्चरण होना चाहिए ये मोबाइल में फिक्स नहीं हो सकता। शास्त्रों के अनुसार भी कुछ मंत्रों का सुबह जाप होता है, कुछ मंत्र संध्याकालीन है एवं कुछ मंत्र रात्रिकालीन भी होते हैं।

इसके अलावा चलते हुए मंत्र के बीच में ही फोन उठ जाने से मंत्र खंडित हो जाता है। अर्थात मंत्र अपूर्ण रह जाता है जिसके दुष्परिणाम ज्योतिषीय दृष्टि से सुनने वाले व सुनाने वाले दोनों को भुगतने पड़ सकते हंै।

हर मंत्र, हर आदमी को काम में नहीं लेना चाहिए क्योंकि जन्मकुण्डली के अनुसार बारह लगA/राशि होती हैं। इन 12 लग्नों में अलग-अलग मंत्र, अलग-अलग लग्न वालों के लिए फायदेमंद या नुकसानदायक होते हैं। आम आदमी को रिंगटोन (मंत्रों की) रखते हुए ध्यान नहीं रहता कि रखी हुई मंत्र टोन से उसे फायदा है अथवा नुकसान। यही नहीं कुछ मंत्र औरतों के लिए खासतौर पर वर्जित हैं तब भी वह अपने मोबाइल में उनका इस्तेमाल कर लेती है।

उदाहरण के रूप में किसी व्यक्ति की जन्मपत्रिका के प्रथम भाव में जो राशि स्थित है उस राशि का विपरीत ग्रह, प्रथम भाव में बैठा है या उसकी दृष्टि पड़ रही है, यदि वह व्यक्ति उस विपरीत (शत्रु) देवता के मंत्र की रिंगटोन रखेगा तो उसे शारीरिक पीड़ा, मानसिक पीड़ा यानी डिप्रेशन आदि रह सकता है। यदि भाग्यवश सही ग्रह प्रथम भाव में सही राशि में है तो रिंगटोन लाभ देगा।

द्वितीय भाव यदि जन्मपत्रिका के द्वितीय भाव में स्थित राशि का विपरीत ग्रह द्वितीय भाव में ही बैठा है और उससे संबंधित देवता के मंत्र की रिंगटोन प्रयोग की जाती है तो उस व्यक्ति के कुटुम्ब में (घर में) परेशानियां, आंखों में तकलीफ आदि रहेगी।

तृतीय भाव यदि तृतीय भाव में स्थित राशि का विरोधी ग्रह तृतीय भाव में बैठा है तो उस विरोधी ग्रह से संबंधित देवता के मंत्र की रिंगटोन का प्रयोग करने से भाई-बहनों को परेशानी, पराक्रम में कमी तथा हाथों में तकलीफ पैदा हो सकती है।

चतुर्थ भाव जन्मपत्रिका के चतुर्थ भाव में जो राशि स्थित है यदि उस राशि का विरोधी ग्रह उसमें बैठा है तो उस राशि के विपरीत देवता के मंत्र की टोन का प्रयोग करने पर माता को परेशानी, जमीन-जायदाद के सुख में कमी पैदा होगी।

पंचम भाव जन्मपत्रिका के पंचम भाव में स्थित राशि के विरोधी ग्रह से संबंधित देवता के मंत्रों की रिंगटोन का प्रयोग करने से पढ़ाई में दिक्कत, मित्रों से संबंध ठीक नहीं रहना, संतान को कष्ट, खेल में बाधा आ सकती है।

छठा भाव यदि जन्मपत्रिका के छठे भाव में स्थित राशि के विरोधी ग्रह से संबंधित देवता के मंत्रों की रिंगटोन रखते हैं तो उस आदमी को रोग परेशान करेंगे, ऋण बढ़ेगा व शत्रु हावी होंगे। सप्तम भाव जन्मपत्रिका के सप्तम भाव में स्थित राशि के विरोधी ग्रह के देवता की रिंगटोन का प्रयोग करने से पति-पत्नी के संबंध बिगडेंगे। यदि अविवाहित हैं तो शादी में विलम्ब होगा, अचानक दुघर्टना होना आदि भी घटित हो सकता है।

अष्टम भाव जन्मपत्रिका के अष्टम भाव में स्थित राशि का विरोधी ग्रह यदि अष्टम भाव में बैठा है या उस विरोधी ग्रह की दृष्टि अष्टम भाव पर है तो उस देवता के मंत्र की रिंगटोन का प्रयोग करना घातक सिद्ध हो सकता है। विदेश यात्रा में बाधा, भूत-प्रेत का डर आदि संबंधित परेशानियां संबंधित व्यक्ति को झेलनी पड़ सकती हैं।

नवम भाव जन्मपत्रिका के नवम भाव में स्थित राशि के विपरीत देवता से संबंधित मंत्र की रिंगटोन रखने से भाग्य फल में कमी आना, मनोबल कमजोर होना समेत हर कार्य में बाधा आ सकती है।

दशम भाव जन्मपत्रिका के दशमभाव में स्थित राशि के विपरीत देवता के मंत्रों की रिंगटोन रखने से नौकरी, व्यवसाय में परेशानी तथा पिता को तकलीफ व हर काम में बाधा रह सकती है।

ग्यारहवां भाव जन्मपत्रिका के 11 वें भाव में स्थित राशि के विरोधी देवता के मंत्रों की रिंगटोन यदि कोई व्यक्ति रखता है तो उसे लाभ(आय) में कमी, हाथ-पैर में परेशानी, स्वास्थ्य से संबंधित परेशानियां उत्पन्न हो सकती हैं।

बारहवां भाव जन्मपत्रिका के 12 वें भाव में स्थित राशि का शत्रुग्रह, यदि 12 वें भाव में बैठा है या उसकी दृष्टि 12 वें भाव पर है। यदि उस विपरीत देवता के मंत्र की रिंगटोन मोबाइल धारक बजाता है तो उसे खर्चा अधिक होगा, आंखों में तकलीफ, पड़ोसियों से शत्रुता तथा विदेश यात्रा में बाधा आदि रह सकती है। यह फलित इस प्रकार देखना चाहिए।

जिस भाव का फल देखना हो उस भाव में स्थित राशि के स्वामी ग्रह को तालिका में देख लें और पंचधा मैत्री चक्र द्वारा उस ग्रह के शत्रु या अतिशत्रु ग्रह को देख लें। यदि वह शत्रु ग्रह उस राशि में स्थित है तो उस का फलित देख लें। कोई भी व्यक्ति यदि मोबाइल में किसी देवता के मंत्रों की रिंगटोन रखता है, तो वह ज्योतिष के आधार पर मंत्रों का चयन करके ही रिंगटोन डाले। जाने अनजाने में जो मोबाइल धारक मंत्रों की रिंगटोन रखते है बड़ी समस्याओं को दावत दे रहे हैं।

यह अच्छी बात है कि धार्मिक मंत्रों का प्रचलन मोबाइल में रिंगटोन या डोर बैल के माध्यम से बढ़ रहा है। बच्चे, जवान तथा बूढ़े सभी वर्ग के लोग चाहे वे मंत्र की शक्ति व महत्व नहीं समझते हो लेकिन मंत्रों के प्रति धार्मिक विचार व आस्थाएं बढ़ रही हैं।

इस वजह से आगामी वर्षो में प्रेम भाईचारा, सहानुभूति आदि सद्गुण लोगों में बढेंगे। वैसे उचित तो यही रहेगा कि मोबाइल में मंत्रों की रिंगटोन न रखते हुए जो मंत्र आपके लिए ज्योतिषानुसार फायदेमंद है, उसका सही उच्चरण अपने मुख से करें तो यह ज्यादा लाभकारी होगा।





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yashpal singh
Friday, 30th May 2008, 11:03
yeh bhi toh batayei kaun sa grah ki mantra kaun sa hai