HomeVaamaRelationships Relationships

मुझे मिलना है मां! क्या मिलोगी?

प्रिय मां,

सादर प्रणाम.

मां, ये शायद पहला शब्द होता है जो हर बच्च बोलता है। बचपन में मां से जुदा होने का उतना गम नहीं जितना इस बात का कि मां मुझे क्यों अकेला छोड़ गईं। मां मेरी 6 बहन थी। चार बहन ब्रेस्ट कैंसर से गुजर गईं जिनमें मेरी मां भी थी। उस समय मैं महज पांच साल का था। उस वक्त शायद मुझे आपकी बहुत जरूरत थी। मेरी मौसी जो यूएस में रहती थी, अपनी बहनों की मौत से सचेत हो समय पर इलाज करवाया और आज बिना ब्रेस्ट और युटरस के जिंदा तो हैं। आज उनके बेटे को अमरीका में एक अच्छे सीईओ के रूप में जाना जाता है।

मां आप मुझे एक अच्छा इंसान बनाकर दुनिया से जा सकती थीं। मुझे बड़ा अजीब सा अहसास होता है जब डैड बताते हैं कि तुम्हारी मां बच सकती थी पर उन्होंने समय पर अपना इलाज नहीं कराया। डैड जब आपको टाटा मेमोरियल कैंसर संस्थान,मुंबई जबर्दस्ती ले गए तो डॉक्टर ने कहा था कि यू टू प्रोफेसर्स फ्राम बिहार, नाउ इट्स टू लेट। मुझे बस इतना पूछना है आपसे मिलकर कि मम्मा, क्यों किया आपने ऐसा?

मैं जानता हूं मां कि आपसे अब मिलना संभव नहीं है। पर भगवान के दरबार में अगर ऐसा कोई प्रावधान है तो एक बार आकर मेरी जिज्ञासा शांत कर दे मां। आज तक तेरे बिना जितनी भी तकलीफें उठाईं हैं सबके लिए आपको माफ कर दूंगा। मां मैं तो आपका चेहरा तक नहीं पहचानता। मां तू तो मुझे उस समय छोड़ गई थी जब मैं बमुश्किल अपने पैरों पर खड़ा होना सीख पाया था। डैड ने दूसरी शादी नहीं की और अपने लाल को इस बेरहम दुनिया से लड़ने लायक बनाया।

मेरे डैड ने मेरी परवरिश में कोई कोर कसर बाकी छोड़ी पर उन्हें खाना बनाना नहीं आता था और उन्हें सबसे ज्यादा तकलीफ तब हुई थी जब कुपोषण के कारण उनके इकलौते पुत्र को टी.बी जैसी बीमारी हो गई थी। संक्रामक और डॉक्टरों के बार बार चेताने के बाद भी मुझे उस अवस्था में भी साथ सुलाते थे और सीने से लगाकर रखते थे। शायद मैं आपकी आखिरी निशानी था इसलिए। मेरे तो मम्मी और पापा दोनों वही थे।

क्यों अपना इलाज आपने समय रहते नहीं कराया? जहां तक मुझे पता है अज्ञानता और पैसे का अभाव तो आपकी राह में नहीं आया होगा क्यांेकि आप एक बेहद अमीर जमींदार खानदान से थीं और बिहार के मोतिहारी शहर में हिंदी प्रोफेसर के रूप में आपकी धाक हुआ करती थी। विदेश से आपकी बहन भी कहा करती थी एक बार यहां आ जाओ बस। पर आप नहीं गईं और मैं ताउम्र उस इन्कार की कीमत चुकाता रहूंगा।

मैं सिर्फ वजह जानना चाहता हूं मां। मैंने आपके बिना न जाने कितने कष्ट सहे हैं इसलिए सिर्फ ये कहने से काम नहीं चलेगा कि भगवान यही चाहता था। क्या आप अपने परोपकारी स्वभाव के कारण अपनी बहनों का इलाज करवाते करवाते काफी देर से जागीं? क्या आपको मैं या डैड पसंद नहीं थे? क्या आपने इलाज में पैसे को झोंकना मुनासिब नहीं समझा? क्या आप कैंसर से लड़ने से डरती थीं?

एक अंतिम अहसान कर दे मां, मुझे अकेला छोड़ जाने का सही सही कारण बता दे बस। मैं मिलते वक्त क भी ऐसा नहीं कहूंगा कि मां, मुझे तू गले लगा ले, मैं महसूस करना चाहता हूं कि मां का ममता कैसी होती है? ये एक बेटे का वादा है कि मैं आपको परेशान नहीं करुंगा। मुझे मिलना है मां! क्या मिलोगी? मिलन की बाट जोहता .......

तुम्हारा अपना पुत्र

प्रहलाद प्रियदर्शी

पत्र के लेखक प्रहलाद प्रियदर्शी भास्कर डॉट कॉम में उपसंपादक के पद पर कार्यरत हैं।





अपने विचार यहां लिखें
नाम:
ईमेल आईडी:
भाषा चुनॆ
हिन्दी रॊमन‌ हिन्दी फॊनॆटिक English
विचार:
कोड:
 

आपके विचार
Ajay Sharma
Tuesday, 24th Jun 2008, 17:50
Dear Brother hellow I am mr.ajay sharma main aapki baat se bahut dukhi hoon kyonki mari real life bhi kuch aisi he hai lakin bhagwan ke aage kiski chalti hai himmat rakho , main bus itna hi kahna chahta hoon ki aap life main aisa koi bhi kaam na kare jo aapki mummy ko accha na lagta tha, agar aap koi accha kam karoge to usme aapki mummy ka naam jarur aayega ki vo unka beta hai, Thanks, Your Friend Mr. Ajay Sharma Distt. Solan (H.P.)
amar
Thursday, 3rd Jul 2008, 16:04
अच्छा