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कविता : वो बूढ़ी सी अम्मा

वो बूढ़ी सी अम्मा

गोरी से पीली

पीली से काली हो गई हैं अम्मा

इक दिन मैंने देखा

सचमुच बूढ़ी हो गई है अम्मा।

कुछ बादल बेटे ने लूटे

कुछ हरियाली बेटी ने

एक नदी थी

कहां खो गई रेती हो गई हैं अम्मा

देख लिया है सोना चांदी

जब से उसके बक्से में

तब से बेटों की नजरों

अच्छी हो गई हैं अम्मा।

कल तक अम्मा अम्मा कहते

फिरते थे जिसके पीछे

आज उन्हीं बच्चों के आगे

बच्ची हो गई है अम्मा।

घर के हर इक फर्द की आँखों में

दौलत का चश्मा हैं

सबको दिखता वक्त कीमती

सस्ती हो गई अम्मा।

बोझ समझते थे सब

भारी लगती थी लेकिन जब से

अपने सर का साया समझा

हल्की हो गई अम्मा।---------------

संपर्क

संजय सेन सागर

ड़ाँ निशीकांत तिवारी के पीछे, आदर्श नगर ,मकरोनियाँ चौराहा, सागरमध्यप्रदेश पिन 470004





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meenal
Wednesday, 21st May 2008, 13:55
दिल कॊ छु गई है यॆ कविता....धन्यवाद‌