मुंबई. कहते हैं नेताओं की कथनी और करनी में बहुत फर्क होता है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) के नेता भी इसके अपवाद नहीं है। पार्टी महासचिव अतुल चांडक और अरुण सरपोतदार ने हाल ही में उत्तर भारतीयों पर मराठियों की नौकरी झटकने का आरोप लगाया था, लेकिन खुद इन दोनों के रेस्त्रां में अधिकांश उत्तर भारतीय ही काम करते हैं।
मराठी संस्कृति भी नदारद : चांडक की कंपनी पंचवटी ग्रुप ऑफ होटल्स द्वारा बांबे हॉस्पिटल के पास चलाए जा रहे पंचवटी गौरव रेस्त्रां में कैशियर को छोड़ कर लगभग पूरा स्टाफ उत्तर भारतीय है। रेस्त्रां में भी मराठी संस्कृति की कोई झलक देखने को नहीं मिलती है। यहां तक की मेन्यू में भी ‘आमरस’ को छोड़ दें, तो कोई मराठी डिश मौजूद नहीं है।
योग्य महाराष्ट्रीयन नहीं मिला : दूसरी ओर, मराठी लोगों को हर तरह के काम में सक्षम बताने वाले सरपोतदार के बांद्रा के खेरवाड़ी स्थित रेस्त्रां और बार ‘राजयोग’ में गेटकीपर को छोड़कर कोई भी मराठी में बात नहीं करता है और वह भी मराठी नहीं, बल्कि नेपाली है। यह पूछे जाने पर कि उन्हें अपने रेस्त्रां में मराठियों को काम क्यों नहीं दिया, सरपोतदार ने कहा कि ‘यदि योग्य मराठी व्यक्ति नहीं मिलता है, तो हम क्या कर सकते हैं।’
अंधेरी में भी ‘अंधेरा’: एमएनएस के पाखंड का एक और उदाहरण अंधेरी में भी देखने को मिलता है। पार्टी के अंधेरी के क्षेत्रीय प्रमुख संदीप दलवी के अंधेरी स्टेशन के बाहर स्थित झुणका भाकर केंद्र में एक भी मराठी काम नहीं करता है। केंद्र चलाने के लिए दक्षिण भारतीय विश्वनाथ करोदेयन को नियुक्त किया गया है। दलवी कहते हैं कि यह केंद्र मेरी व्यक्तिगत संपत्ति है। यहां मराठी या उत्तर भारतीयों का मामला लागू नहीं होता है। हम दक्षिण भारतीय डिश पेश करते हैं और व्यवसाय चलाने के लिए विशेषज्ञों की जरूरत होती है।
* ‘रेस्त्रां खोलने पर मैंने 150 लोगों को इंटरव्यू लिया था, लेकिन एक भी मराठी काम का नहीं मिला। ऐसा एक भी मराठी नहीं आया, जो धाराप्रवाह अंग्रेजी बोल सके।’
- अरुण सरपोतदार, महासचिव एमएनएस
* ‘पंचवटी गौरव का उत्तर भारतीय स्टाफ महाराष्ट्र में पिछले 30 साल से रह रहा है। इसके अलावा सोलापुर, कोल्हापुर और महाराष्ट्र के दूसरी हिस्सों में स्थित मेरी बीड़ी फैक्ट्री में 8000 से ज्यादा मराठी कामगार हैं।’
- अतुल चांडक, महासचिव एमएनएस