नई दिल्ली.
भले ही धर्मेद्र ने खुद राजनीति में छलांग लगाई हो, लेकिन अब उनका कहना है कि फिल्मी सितारों को राजनीति से दूर ही रहना चाहिए। उनके मुताबिक, एक अभिनेता को अभिनेता ही रहना चाहिए और राजनीति में कभी भी उतरना नहीं चाहिए।
फिल्म उद्योग में इस वर्ष 50 साल पूरे करने वाले अभिनेता से राजनेता बने धर्मेंद्र ने कहा, ‘मैं यह नहीं कहता कि राजनीति में आना गलती थी, लेकिन इसके बावजूद मुझे लगता है कि अभिनेता को राजनीति में नहीं आना चाहिए, क्योंकि इससे दर्शकों और प्रशंसकों के बीच सामान्य स्वीकार्यता बंट जाती है। इतने सालों में मुझे अपने प्रशंसकों से जो प्यार और समर्थन मिला है वह मेरी महानतम उपलब्धि है।’
समस्याओं के समाधान का दावा : संसद और अपने निर्वाचन क्षेत्र बीकानेर से गैर हाजिरी को लेकर होने वाली आलोचना के बारे में उन्होंने साफ किया, ‘मैं अपने निर्वाचन क्षेत्र की समस्याओं की हमेशा जानकारी लेता रहता हूं। सुर सागर की सफाई से लेकर बच्चों की स्कूलों की फीस न्यूनतम करने, रंगमंच का जीर्णोद्धार और पुल बनाने तक मैं हर समस्या का हल करने की कोशिश में लगा रहता हूं।’
ध्यान खींचने के लिए नहीं : सांसद धर्मेंद्र ने बताया, 'मेरा बीकानेर स्थित कार्यालय मुझे लोगों की मांगों के बारे में नियमित जानकारी देता रहता है। मैं एक किसान परिवार से हूं इसलिए मैं उनकी कठिनाइयां समझता हूं। इसमें कोई राजनीति नहीं है। मैं अभिनय या राजनीति में कोई भी काम ध्यान खींचने के लिए नहीं करता।'
पुरस्कार का हकदार था : यह पूछे जाने पर कि 50 से ज्यादा सिल्वर जुबली फिल्में देने के बावजूद उन्हें श्रेष्ठ अभिनेता का एक भी पुरस्कार क्यों नहीं मिला, धर्मेंद्र ने कहा कि उनके लिए प्रशंसकों का प्यार और समर्थन ही सबसे बड़ा पुरस्कार है। वे इस बात पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते कि उन्हें कोई पुरस्कार क्यों नहीं मिला लेकिन, उनका मानना है कि 'फूल और पत्थर', 'सत्यकाम', 'चुपके चुपके', 'प्रतिज्ञा', 'शोले', 'नया जमाना' जैसी फिल्मों के लिए वे पुरस्कार के हकदार थे।