नई दिल्ली. रेलवे की चाकचौबंद सुरक्षा व्यवस्था के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर की 45 बड़ी कंपनियां मैदान में हैं। रेलवे संपत्ति और रेल यात्रियों को विश्वस्तरीय सुरक्षा मुहैया कराने के प्रति गंभीर रेल मंत्रालय ने पहली बार संरक्षा और सुरक्षा को लेकर व्यापक रणनीति बनाई है। पीपीपी मॉडल पर बनाई गई योजना में कंपनी के चयन में कोई जल्दबाजी दिखाने की बजाय रेलवे बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारी फिलहाल विभिन्न कंपनियों की योजनाओं पर सुरक्षा विशेषज्ञों से अलग-अलग राय मशविरा कर रहे हैं। रेलवे बोर्ड में तैनात एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि संरक्षा और सुरक्षा को लेकर धन की कतई कमी नहीं होने दी जाएगी।
स्क्रीनिंग प्रोसेस में अफसर : स्क्रीनिंग के लिए आरपीएफ के अतिरिक्त महानिदेशक स्तर के अधिकारी की अध्यक्षता में सात सदस्यीय वरिष्ठ अधिकारियों की टीम गठित की गई है। दल की बैठकों में वित्त, सिग्नल और टेलीकॉम विभाग के मुखिया भी शिरकत कर रहे हैं।
कंपनियां जो मैदान में हैं : घरों को सुरक्षा के लिहाज से विभिन्न आधुनिक उपकरणों से लैस करने वाली Êाइकॉम, टीसीएस, विप्रो और नेलको ऐसी कंपनियां हैं, जिन्होंने भारतीय बाजार में पहले ही धूम मचा रखी है। अमेरिका की क्रोल सिक्युरिटी और इजराइल की एक प्रमुख सिक्युरिटी कंपनी सहित अन्य कंपनियां भारतीय रेलवे में काम पाने को उत्सुक हैं।
उपकरणों से लैस होंगे स्टेशन : स्टेशन पर लगाए जाने वाले उपकरणों में आईपी सिस्टम पर आधारित सीसीटीवी शामिल है, जो संदिग्ध गतिविधियों से बीप द्वारा सुरक्षाकर्मियों को आगाह करेगा। तीस दिनों तक लगातार रिकॉर्ड करने की सुविधा वाले इस उपकरण को विदेशों में खासी पहचान मिली है। भारतीय रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों की रेलमपेल को देखते हुए हर यात्री को मशीन से गुजारना और उन पर नजर रखना कतई संभव नहीं, इसीलिए ऐसे सुरक्षा उपकरण को भी फेहरिस्त में शुमार किया गया है, जो दूर से ही हर यात्री पर पैनी नजर रखने में सक्षम हैं। बम खोजने और उसे डिफ्यूज करने की एक बेहद छोटी मशीन को भी अधिकारी कारगर हथियार मान रहे हैं।