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सितारा माताओं का सीक्रेट एजेंडा?

परदे के पीछे.नीतू सिंह माताओं के अंतरराष्ट्रीय दिवस पर मदर टेरेसा या उन तमाम माताओं पर लिखना चाहिए जो अपने खून-पसीने से बच्चों को पालती हैं और उन माताओं को सलाम करना चाहिए जो दूसरों के बच्चों पर प्यार निछावर करती हैं, क्योंकि यही ममता की उच्चतर परिभाषा है, परंतु फिल्म के कॉलम में सितारा माताओं की बात करें जिनका समाज और फिल्म उद्योग में आदर, उनके बच्चों की बॉक्स ऑफिस कामयाबी पर निर्भर करता है। आज की चर्चित मां हैं नीतू ऋषि कपूर, क्योंकि उनका बेटा रणवीर पहली फिल्म ‘सावरिया’ की असफलता के बावजूद भव्य सितारा है। नीतू सिंह ने स्वयं सफल पारी खेली है। नियमित योग और सख्त अनुशासन से नीतू सिंह ने स्वयं को सुडौल और सुंदर बनाए रखा है। आए दिन टेलीविजन और फिल्म उद्योग से उन्हें प्रस्ताव मिलते हैं, जिन्हें वेअस्वीकार कर देती हैं। नीतू सिंह ने अपने पुत्र रणवीर और पुत्री रिद्घमा को अच्छे संस्कार दिए हैं।

तनूजा कपूर खानदान की बबीता सफल सितारा रहीं, परंतु अच्छी अभिनेत्री नहीं रहीं। रणधीर कपूर से उनकी प्रेम कहानी और दाम्पत्य जीवन हमेशा बाढ़ वाली नदी की तरह रहा है। उन्होंने अपने व्यक्तिगत कारणों से अपनी दोनों बेटियों को शिशु अवस्था से ही सितारा बनाने की बात घुट्टी में डालकर पिलाई है और इस लक्ष्य को पाने के लिए वे बहुत ही केंद्रित रही हैं। उन्होंने बेटियों को सिर पर लटकती तलवार की तरह नही वरन् स्वयं के सम्मान को बढ़ाने वाले हथियार की तरह पाला है। यही कारण है कि दोनों पुत्रियों ने हर पुरस्कार को ग्रहण करते हुए केवल अपनी मां को धन्यवाद दिया है गोयाकि कपूर कन्या होने का उन्हें लाभ ही नहीं मिला हो। क्या ये तीनों सफल महिलाएं वंश के प्रभाव या डीएनए की हकीकत से इनकार कर रही हैं। रणधीर ने हमेशा बेटियों को दिल से चाहा है और संकट के समय मदद भी की है। अभिषेक प्रकरण के बाद पिता और महान दादी बहुत काम आए हैं। बहरहाल बबीता ने अपना लक्ष्य पा लिया है, परंतु क्या सफर सुहाना रहा और आज वे शांत या संतुष्ट हैं? क्या करीना उनके नियंत्रण में उतनी ही हैं, जितनी करिश्मा रही हैं। वे एक एंग्री मदर रही हैं और मां के पारंपरिक दायरे में यह आता नहीं।

जया बच्चन कॉजोल की मां तनूजा हमेशा बिंदास बेफिक्र औरत रही हैं और वे अपने जमाने से बहुत आगे रही हैं, परंतु उनकी मां शोभना समर्थ से ज्यादा साहसी और आधुनिक इस परिवार में कोई नहीं रहा है। कॉजोल अत्यंत प्रेमल होते हुए भी आधुनिका हैं। उनके साथ कोई पंगा नहीं ले सकता। कॉजोल अपनी मां तनूजा का श्रेष्ठतम परिचय हैं। अभिषेक की मां जया बच्चन ने परदे पर हजार चौरासी की मां का चरित्र निभाया है और मजे की बात है कि सारी भूमिकाओं को करने के बाद भी उन्होंने अपनी गुड्डी वाली छवि को कायम रखा है। उनकी बेटी श्वेता उनकी कमजोरी है और अभिषेक ताकत।

सितारा पुत्र ओर पुत्रियां हमेशा अपनी माताओं की बेटियां-बेटे अधिक रहे हैं बनिस्पत पिता के बेटे- बेटियों से, क्योंकि स्टारडम में आकंठ आलिप्त पिता हमेशा बहुत व्यस्त रहा है और बच्चों का लालन-पालन मां की जवाबदेही रहा है। माताएं अपने पतियों की तमाम आदतों और हरकतों से वाकिफ रही हैं। अत: लालन-पालन में उनका सीकेट्र एजेंडा भी रहा है। सारे सितारा बच्चों पर उनकी आयाओं का भी प्रभाव है, क्योंकि धनाढ्य घरों मे माताएं आया के बिना कुछ कर ही नहीं पातीं।





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