अमृतसर. सरबजीत की फांसी की सजा तो लगभग माफ हो ही चुकी है, अब रिहाई के लिए प्रयास करने हैं। पूरी उम्मीद है कि दो-तीन महीने में रिहाई के प्रयासों के नतीजे मिल जाएंगे। यह बात पाकिस्तान के पूर्व मानवाधिकार मंत्री और संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार समिति के सलाहकार अंसार बर्नी ने कही है। वहीं, सरबजीत के वकील हामिद राणा का कहना है कि अगर फांसी की सजा उम्रकैद में बदली गई तो सरबजीत की रिहाई अपने आप हो जाएगी।
बर्नी ने फोन पर बातचीत में बताया कि फांसी पर अनिश्चितकाल के लिए रोक का मतलब ही व्यावहारिक रूप में फांसी पर रोक है। इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ कि ऐसी रोक के बाद किसी को फांसी की सजा हुई है। अगर सबकुछ ठीक रहा तो दो महीनों में औपचारिक घोषणा हो जाएगी।
उन्होंने कहा कि सरबजीत के लिए कानूनी लड़ाई लड़ी गई है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी के सामने भी पक्ष रखा गया है। गिलानी ने पूरे मामले पर विचार के लिए पाकिस्तान के आंतरिक मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और कानून मंत्रालय को जिम्मेदारी सौंपी है।
उम्रकैद की सजा पूरी : बर्नी के मुताबिक पाकिस्तान में उम्रकैद 25 साल की होती है, जबकि सरबजीत 17-18 साल की सजा काट चुका है। जेल में कार्यदिवसों के अलावा छुट्टी के दिन गिने जाने पर सजा की अवधि पूरी हो जाएगी। वहीं, वकील राणा का कहना है कि माफी और रिहाई दोनों का अधिकार अब सिर्फ सदर-ए-पाकिस्तान के पास ही है। सजा अगर उम्रकैद में तब्दील होगी तो साथ में रिहाई के आदेश भी होंगे, क्योंकि सरबजीत ने उम्रकैद की सजा काट ली है। ऐसा नहीं होने पर सजा के समय को लेकर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में अपील की जा सकती है।
भगवान जरूर सुनेगा हमारी : सरबजीत की बहन दलबीर कौर ने कहा कि भगवान हमारी जरूर सुनेगा। वहीं पत्नी सुखप्रीत कौर, बेटियां पूनम और स्वप्नदीप ने कहा कि भगवान ने चाहा तो जल्द ही हम अपने घर में सरबजीत से मिलेंगे। पाकिस्तान से आ रहे संदेशे भी हमें उम्मीद बंधा रहे हैं।