बड़वानी. ग्राम पंचायतों ने अपने स्तर पर बिजली बचाने की शानदार पहल की है। गांवों की गलियों को रोशन करने के लिए लगाए जाने वाले सोडियम लैंप, बल्ब व ट्यूबलाइट के स्थान पर सीएफएल (कॉम्पेक्ट फ्लोरोसेंट लैंप) का उपयोग किया जा रहा है। इससे जहां पंचायत के बिजली बिलों में कमी आई वहीं बार-बार बल्ब फ्यूज होने जैसी समस्या से भी लगभग निजात मिल गई है।
सुराणा के उप सरपंच मांगीलाल अगलचा ने बताया हमने निर्णय लिया कि क्यों न सीएफएल का उपयोग किया जाए। इसके चलते अब गांव में करीब 40 से अधिक सीएफएल बिजली के खंभों पर लगे हैं। 40 वाट के सीएफएल लगाने के बाद बिजली का बिल घटकर आधा हो गया है वहीं बल्ब फ्यूज होने पर बार-बार लगने वाला तीन से चार हजार रुपए का खर्च भी बच गया है। अभी तक एक भी सीएफएल बदलने की नौबत नहीं आई।
समस्या से निकला नायाब समाधान : मंडवाड़ा के उप सरपंच ने बताया सीएफएल लगाने के लिए शासन की तरफ से कोई आदेश नहीं आया। यह तरीका हमने वोल्टेज की समस्या से त्रस्त होकर अपनाया है। हालांकि ऐसा सिर्फ सुराणा ग्राम पंचायत में ही नहीं हुआ है बल्कि इसे बोरलाय, धनोरा, पीपरी व धार जिले के सिंघाना में भी अपनाया गया है। बोरलाय सरपंच रामेश्वर कनासिया के मुताबिक स्ट्रीट लाइट के 150 खंभों पर सीएफएल लगाने के बाद पता चला कि ये कम वोल्टेज में भी अच्छी रोशनी दे रहे हैं। धनोरा में ३६ वाट की सीएफएल लगाई गई है।
सीएफएल का असर
गांव- मासिक बिल- सीएफएल के बाद
सुराणा- 1100-1200.- 500-600 रुपए
बोरलाय- 3000-3200.- 2500-2600 रु.
धनोरा- 2000-2100.- 1500-1600 रु.
पंचायतें अपने स्तर पर लगा सकती हैं
* पंचायतों को स्ट्रीट लाइट के लिए राशि मिलती है। पंचायत अपने स्तर पर इन्हें लगा सकती है। यदि ऐसा है तो यह अच्छी बात है। इससे जहां बिल में कमी आएगी वहीं अच्छी सर्विस भी मिलेगी।
-सुरेश्वरसिंह, जिला पंचायत सीईओ, बड़वानी