इंदौर.
भारत धर्मो का देश है इसलिए यहां धार्मिक संगीत ज्यादा सुना जाता है। संगीत का ये स्वरूप सिर्फ हमारे देश में ही देखने को मिलता है। भजन की लोकप्रियता किसी भी युग में कम नहीं होगी। ये बात कही ख्यात भजन गायक अनूप जलोटा ने, वे रविवार को इंदौर में एक निजी कार्यक्रम में आए थे।
गजलों की लोकप्रियता घटी
इस दौर में हर तरह का संगीत सुना जा रहा है। धूमधड़ाके के इस दौर में सबसे ज्यादा आहत हुई है तो वो है गजल। अनूप जलोटा कहते हैं कि गजल सुनने वाले भी घट रहे हैं इसलिए म्यूजिक कंपनियां भी इस ओर कम काम कर रही है। शास्त्रीय संगीत ज्यादा नहीं सुना जाता इसके लिए ऐसी कोशिशें करना चाहिए कि युवा ज्यादा से ज्यादा इस संगीत की मौलिकता को पहचानें।
आत्मा से गाने की कोशिश
उन्होंने बताया, अभी मेरा एक नया एलबम सोलफुल भजन आने वाला है जिसमें सभी इष्ट देवों के भजन शामिल किए गए हैं। मैंने कोशिश की है इन भजनों को आत्मा से गाने की, इसलिए इसका नाम रखा सोलफुल भजन। बहुत दिनों बाद अंतर्मन से ये एलबम बनाने की प्रेरणा मिली और मैंने भी देर नहीं लगाई।
‘तेरे लिए’ आया पसंद
वे ज्यादा फिल्मी संगीत नहीं सुनते लेकिन कुछ सालों पहले की फिल्म वीर जारा का संगीत उन्हें पसंद आया। वे बताते हैं, ‘तेरे लिए हम हैं जिए’ मुझे काफी पसंद है। ये मदन मोहन की पुरानी धुन है जिसे बहुत शानदार ढंग से पॉलिश किया गया है।
कलाकार की संतुष्टि
अपने कलाकार जीवन से बहुत संतुष्ट हूं, मैं सोचता हूं जितना मैंने संगीत के लिए किया उसके बदले में मुझे कहीं ज्यादा हासिल हुआ। कभी कभी कोई ऐसा लम्हा आता है जब कलाकार के तौर पर लगता है कि जीवन सफल हो गया।