इंदौर. अखिल भारतीय वैश्य महासम्मेलन ने शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए कोष की स्थापना की। यह केवल वैश्य समाज के लिए नहीं, सभी जरूरतमंद लोगों के लिए होगा। इसकी शुरुआत पांच लाख रुपए से की गई। इसके साथ वैश्य समाज के सभी घटकों में रोटी-बेटी का व्यवहार बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।
रविवार को नेहरू पार्क में आयोजित वैश्य महाकुंभ को संबोधित करते हुए महासम्मेलन के अध्यक्ष व सांसद गिरीश संघी ने कहा वैश्य समाज को कई बार बांटा गया। सम्पन्न होने के बावजूद हमें सलाम करना पड़ता है। सलामी लेने के लिए हमें संगठित होना पड़ेगा। भारत को महाशक्ति बनाने में आने वाली चुनौतियों का सामना करने की क्षमता वैश्यों में ही है। ‘जाति तोड़ो, जमात बनाओ’ की भावना के साथ समाज के घटकों में रोटी-बेटी का व्यवहार बढ़े और महिलाओं की शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाए। देश में वैश्य समाज के 372 घटक और करीब 16 करोड़ लोग हैं।
लोक निर्माण मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा वैश्य समाज ने सदैव देश ही नहीं दुनिया को दिशा दी। अब इनके संगठित होने की जरूरत है। 25 वर्ष में हम कितने संगठित हुए अपनी आत्मा से पूछें। आरक्षण नहीं चाहते क्योंकि हम ताकतवर हैं। हमारा अधिकार प्यार से नहीं मिलेगा तो छीनकर ले लेंगे।
नहीं मिलता अपेक्षित सम्मान
वरिष्ठ पत्रकार डॉ. वेदप्रताप वैदिक ने कहा सबसे ज्यादा दान वैश्य देते हैं पर लोग सम्मान देने की बजाय उन्हें कालाबाजारी करने वाले और चोर कहते हैं। महासम्मेलन को भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन भी चलाना चाहिए।
इससे पहले पूर्व मंत्री ललित जैन ने स्वागत भाषण में शिक्षा व स्वास्थ्य के लिए कोष की घोषणा की। श्री संघी का समाज के 40 घटकों के अध्यक्षों और प्रतिनिधियों ने अभिनंदन किया गया। इस दौरान नेहरू पार्क का चिरंजीलाल गुप्ता परिसर खचाखच भरा था। महाकुंभ में आवास एवं पर्यावरण मंत्री जयंत मलैया, पूर्व सांसद नारायणप्रसाद गुप्ता, महासम्मेलन के महामंत्री बाबूराम गुप्ता (दिल्ली), वरिष्ठ उपाध्यक्ष राजीवमोहन गुप्त, युवा अध्यक्ष गोपाल मौर, विष्णु गोयल, विनोद गुप्ता, लक्ष्मीनारायण गुप्ता, प्रदीप अजमेरा, डॉ. जी.डी. नागर मंच पर मौजूद थे। अभिनंदन पत्र अर्चना जायसवाल ने पढ़ा।
वैश्य विभूति सम्मान समारोह के महामंत्री ललित पोरवाल, प्रदेश प्रवक्ता कमल अजमेरा, संभागाध्यक्ष रमेश गुप्ता और जिलाध्यक्ष कैलाशचंद खंडेलवाल ने अतिथियों का स्वागत किया।