भोपाल. मध्यप्रदेश सरकार बेहतर बारिश के लिए बाकायदा इंद्रदेव को मनाने में लगी है। इसके लिए महाराष्ट्र के एक वैदिक संस्थान का सहारा लिया गया है। संस्थान की पहल पर सूखाग्रस्त इलाकों में छह दिवसीय 15 सोमयज्ञ हुए हैं। 10 यज्ञ मप्र और पांच महाराष्ट्र में। यज्ञ के प्रभाव के अध्ययन में वैज्ञानिक भी जुटे हैं और आंकड़ों का विश्लेषण कर रहे हैं।
कहते हैं कि आशा पर आसमान थमा है। सूखी धरती को तरबतर करने की आशा में सरकार की नजरें भी आसमान पर हैं और इस पुनीत कार्य में सिद्घि के लिए यज्ञ का आसरा लिया गया है। जनवरी में औरंगाबाद से आरंभ यज्ञ श्रृंखला की पूर्णाहुति शनिवार को महेश्वर में हुई। प्रदेश में अमरकंटक, छतरपुर, सीधी, सतना, दंदरौआ, ग्वालियर, मुरैना, शिवपुरी, उज्जैन और महेश्वर में ये यज्ञ हो चुके हैं। आयोजकों के अनुसार ये साधारण यज्ञ नहीं बल्कि वृष्टि गर्भधारण अनुष्ठान हैं और जिन जगहों पर ये अनुष्ठान हुए हैं, वहां बारिश के आगमन की अनुमानित तारीख भी तय बताई जा रही है। ..शेष पेज 10 पर
यह वृष्टि का प्रसवकाल होगा। महाराष्ट्र में सोलापुर के पास बार्शी स्थित योगीराज वेद विज्ञान आश्रम के दक्ष 150 आचार्यो में से 30 आचार्य वैदिक विधि विधान से इन अनुष्ठानों में जुटे रहे। मप्र विज्ञान और प्रौद्योगिकी परिषद (मेपकास्ट) इस अनुष्ठान का प्रायोजक है। परिषद के प्रोजेक्ट डायरेक्टर डॉ. एनपी शुक्ला बताते हैं कि साइंस वेलीडेशन ऑफ ट्रेडीशनल नॉलेज स्कीम के तहत यह प्रयोग किया जा रहा है। यज्ञ के प्रभाव को जानने के लिए मेपकास्ट के वैज्ञानिक डॉ. जेपी खरे और अंकित अग्रवाल उन आंकड़ों का अध्ययन कर रहे हैं, जो पोर्टेबल वेदर स्टेशन पर यज्ञस्थल के आसपास से संकलित किए गए हैं।
आश्रम के प्रमुख नानाजी ने भास्कर को बताया-‘देश के 12 ज्योर्तिलिंग मानसून आकर्षित करने वाले सिद्घस्थान हैं, जहां प्राचीन काल में निरंतर ऐसे महायज्ञ होते थे। हमने मध्यप्रदेश के सूखाग्रस्त इलाकों का चयन किया। हर यज्ञ में पोर्टेबल वेदर स्टेशन के जरिए 15 बिंदुओं पर आंकड़े भी जुटाए हैं। इनमें हर आधे घंटे में तापमान, आद्रता, हवा की गति व दिशा, सूर्योदय व सूर्योस्त के समय की लालिमा खास हैं। हमें विश्वास है कि इन इलाकों में इस बार इंद्र की कृपा होगी।’
नानाजी के मुताबिक आश्रम के प्रतिनिधि मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान से मिले थे और उन्हें 1981 से जारी सोमयज्ञों के महत्व व प्रकृति पर दिखाई देने वाले असर से अवगत कराया था। उनके संकल्प के बाद ही प्रदेश में यज्ञ संभव हुए। एक यज्ञ पर करीब आठ लाख रूपए खर्च हुए हैं। नानाजी ने बताया कि सरकार ने यज्ञ के प्रभाव के अध्ययन के लिए आठ लाख रूपए की राशि दी है। यज्ञ की प्रक्रिया के लिए जरूरी धन जनसहयोग से जुटाया गया।
वराहमिहिर की वृहद-संहिता के अनुसार मनुष्य के गर्भधारण और प्रसव की तरह ही बारिश का चक्र निर्धारित है, जिसे वृष्टि गर्भधारण और वृष्टि प्रसव कहा जाता है। मनुष्यों में गर्भधारण के 280 दिन में प्रसव होता है। इसी प्रकार वृष्टि गर्भधारण के 195 दिन में वृष्टि प्रसव का समय निर्धारित है। सोमयज्ञ वृष्टि गर्भधारण के अनुष्ठान हैं। संहिता में वृष्टि गर्भधारण के समय प्रकट होने वाले लक्षण भी बताए हैं, जिनका अध्ययन आश्रम के हर अनुष्ठान में किया जाता है ताकि इसे विज्ञान की वर्तमान कसौटी पर भी प्रमाणित किया जा सके।