भोपाल. खाद्य पदार्थो की कीमतें दुनिया के 40 देशों में राजनीतिक संकट पैदा कर सकती हैं। हैती में सरकार बदल चुकी है, मिस्र में सेना को ब्रेड बनानी पड़ रहीं हैं। संयुक्त राष्ट्र ऐसे करीब 37 देशों की सूची बनाकर बैठा है, जहां खाद्यान्न की कीमतों के कारण राजनीतिक उपद्रव हो सकते हैं। जहां उपद्रव नहीं हो रहे हैं, वहां एक खामोश सुनामी पल रही है।
विश्व बाजार में खनिज तेल की कीमतों में तेजी और महंगे अनाज का असर अभी अंतिम छोर तक पहुंचना बाकी है। संयुक्त राष्ट्र के खाद्य व कृषि संगठन (एफएओ) ने हिसाब लगाया है कि जिन देशों की पारिवारिक आय का 50-60 फीसदी हिस्सा खाने-पीने की वस्तुओं पर खर्च हो रहा है, वहां गंभीर राजनीतिक संकट जन्म ले सकते हैं।
करीब 20 देशों में भारी उपद्रव, पलायन के संकेत दिखाई देने लगे हैं। मिस्र जैसे देशों में ब्रेड संकट इतना गहरा गया कि बिना सब्सिडी या खुले बाजार की ब्रेड की कीमत सरकारी ब्रेड की तुलना में 12 गुनी महंगी हो गई है।
कीमतें घटेंगी नहीं: एशियाई विकास बैंक की रिपोर्ट को देखें तो कीमतों का संकट घटने वाला नहीं है। शुक्रवार को जारी रिपोर्ट ‘लिविंग विद हाई प्राइसेस’ के मुताबिक एशिया के लोगों की खर्च करने की क्षमता 10 फीसदी घट गई है। लिहाजा 2008 में इन देशों के पांच फीसदी अतिरिक्त लोग गरीबी के मुंह में चले जाएंगे।
रोटी पर मचे दंगे
* हैती में सरकार ही बदल गई। कीमतों के खिलाफ प्रदर्शन में लोग मारे गए।
* केन्या, सेनीगल, गिनी, बर्किना फासो, आइवरी कोस्ट, इथोपिया और फिलीपींस में भी खाद्यान्न महंगा होने के कारण उपद्रव।
* भारत, चीन, वियतनाम व मिस्र ने चावल के निर्यात पर रोक लगाई। उसके बाद बांग्लादेश, फिलीपींस और अफगानिस्तान में भारी संकट।