भोपाल. बारिश के पानी को सहेजकर भू-जल स्तर बढ़ाने की एक और कवायद शुरू होने वाली है। इस बार कुओं के जरिए जमीन में पानी उतारा जाएगा। इसके लिए केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय देशभर के उन 800 से ज्यादा ब्लॉक में 1700 करोड़ रुपए खर्च करेगा जहां भू-जल खतरनाक स्तर तक नीचे पहुंच गया है। प्रदेश में इस तरह के 48 ब्लॉक में 150 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे।
सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड (सीजीडब्ल्यूबी) ने देश के 839 ब्लॉक चिह्न्ति किए थे जहां भू-जल स्तर तेजी से गिरा। जानकार समय-समय पर चेताते रहे कि इन ब्लाकों में भू-जल स्तर को ऊपर उठाने या कायम रखने के लिए कदम नहीं उठाए तो हालात और बिगड़ सकते हैं। इसको देखते हुए केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय ने कुओं को रीचार्ज करने की योजना बनाई है। प्रदेश में इस योजना के क्रियान्वयन के लिए ग्रामीण विकास विभाग को नोडल एजेंसी बनाया गया है। नाबार्ड भी इसमें सहयोगी रहेगा। नाबार्ड के जनरल मैनेजर एस.आर. देसाई के मुताबिक प्रदेश के तीन लाख ६क् हजार कुओं को रीचार्ज करने का टारगेट है।
ये है योजना
कुओं को रीचार्ज करने का सिस्टम लगाने के लिए लघु व सीमांत कृषकों को 4800 रुपए तथा बाकी को 2400 रुपए बतौर अनुदान दिया जाएगा। किस तरह का सिस्टम लगाना है, इसके बारे में सीजीडब्ल्यूबी के वैज्ञानिक तकनीकी सहयोग देंगे।
इन जिलों में लागू होगी
भोपाल, सीहोर, बैतूल, छिंदवाड़ा, छतरपुर, शाजापुर, उज्जैन, इंदौर, बड़वानी, बुरहानपुर, देवास, धार, खरगोन, खंडवा, मंदसौर, नीमच, रतलाम, सतना। इन जिलों के सिर्फ उन्हीं ब्लॉक में योजना लागू होगी जिन्हें सीजीडब्ल्यूबी ने चिह्न्ति किया है। इनकी संख्या 48 है जिसमें से 24 में तो भू-जल का दोहन 100 प्रतिशत से ज्यादा हो चुका है, 5में 100 से 90 प्रतिशत तथा 19 में भू-जल का दोहन 70 से 90 प्रतिशत के बीच है।