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International International वाशिंगटन.
एक दुर्घटना में उंगली कट जाने के बाद चमत्कारी पाउडर से इसे ठीक करने में कामयाब रहे अमरीका के एक शख्स की कहानी इन दिनों लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। हालांकि कुछ वैज्ञानिकों ने चमत्कारी पाउडर के दावे को झुठलाते हुए कहा है कि उंगली उगने की यह प्रक्रिया स्वाभाविक या प्राकृतिक चमत्कार हो सकती है।
एक दुर्घटना में कट गई थी उंगली
दरअसल वर्ष 2005 में एक दुर्घटना में ओहायो प्रांत में सिनसिनाटी शहर के 69 वर्षीय ली स्पिवॉक की उंगली का एक हिस्सा कट गया था। बताया जाता है कि एक मॉडल विमान के पंखों की चपेट में उनकी उंगली आ गई थी और उंगली का कटा हुआ हिस्सा भी नहीं मिल सका था। स्पिवाक के भाई पीट्सबर्ग यूनिवर्सिटी में डॉ. स्टीफन बेडीलेक के साथ दवा विभाग में काम करते थे। उन्होंने स्पिवाक को ये चमत्कारी पाउडर यानी एक्स्ट्रासैल्युलर मैट्रिक्स दिया, जिसे स्पिवाक ने अपनी कटी उंगली पर छिड़का। इस पाउडर को सामान्य रूप से ‘पिक्सी डस्ट’ के नाम से जाना जाता है। स्पिवाक का कहना है कि कुछ ही हफ्तों में त्वचा, हड्डी व नाखून के साथ उंगली फिर से उग गई। मालूम हो कि एक्स्ट्रासेलुलर मैट्रिक्स कोशिकाओं की संरचना के लिए जरूरी तत्व है और यह सभी मनुष्यों और जानवरों के ऊतकों में पाया जाता है।
दिल की कोशिकाएं बनाने की कोशिशें जारी
डॉ. वेडीलेक की टीम पहले से ही एक्स्ट्रासैल्युलर मैट्रिक्स की मदद से बहुत सरल जैविक संरचना तैयार करने पर काम कर रही थीं। किंग्स कॉलेज लंदन में कोशिका अध्ययन विभाग में कार्यरत प्रोफैसर स्टीफन मिंगर ने बताया कि फिलहाल वैज्ञानिक इस कोशिश में हैं कि कैसे दिल, मस्तिष्क और यकृत की कोशिकाएं तैयार की जाए। उन्होंने कहा,‘मुझे नहीं पता कि वे एक्स्ट्रासैल्युलर मैट्रिक्स को छिड़ककर उंगली कैसे उगा सकते हैं।
रिपोर्ट का अध्ययन करना चाहते हैं वैज्ञानिक
प्रो. सिंगर कहते हैं,‘अगर उंगली का कटा हिस्सा फिर से जोड़ भी दिया जाए तो तंत्रिका कोशिकाएं फिर नहीं बन पातीं और व्यक्ति को उंगली के हिस्से पर दर्द या दबाव का अहसास नहीं होता।’ वैज्ञानिकों का कहना है कि वे डॉ. बेडीलेक की इस शोध रिपोर्ट का अध्ययन करना चाहेंगे। मतलब साफ है कि भले ही वैज्ञानिक उंगली उगाने की इस घटना को चमत्कारी नहीं मान रहे हों, लेकिन इससे उन्हें शोध की दिशा तय करने में कुछ मदद तो जरूर मिलेगी।