News
Madhya Pradesh
Gwalior Gwalior शिवपुरी. वो मुझसे बेइंतहा प्यार करते थे। मालनपुर से जब भी वे भोपाल आते थे अथवा मैं ग्वालियर जाती थी तो वे मुझसे मिलकर खुश हो जाते थे। वे कहते थे कि कमलेश तुम नहीं होती तो मैं 15 साल पूर्व ही मर जाता। यह कहना है मप्र पुलिस की प्रधान आरक्षक कमलेश मिश्रा का, जिसके बारे में टीआई रमाकांत वाजपेयी ने सुसाइड नोट में लिखा है।
कमलेश ने अपने ऊपर सुसाइड नोट में लिखे गए ब्लैकमेलिंग के आरोपों को नकारा और कहा कि श्री वाजपेयी ने सुसाइड नहीं किया है, क्योंकि वे इतने कमजोर थे ही नहीं कि सुसाइड करते, बल्कि उनकी हत्या की गई है और इसमें उनकी पहली पत्नी व ससुरालीजन शामिल हैं।
भोपाल से शिवपुरी आई प्रधान आरक्षक कमलेश मिश्रा ने दैनिक ‘भास्कर’ से विशेष बातचीत में दिवंगत टीआई रमाकांत वाजपेयी और अपने प्रेम संबंधों का विस्तृत खुलासा किया। कमलेश ने बताया कि श्री वाजपेयी से उनकी मुलाकात करीब 12 साल पूर्व हुई थी और इसके बाद उनके संबंध प्रगाढ़ बने। कमलेश ने बताया कि श्री वाजपेयी से उनको एक बेटी प्रियंका है और उन्होंने जुलाई 2006 में भोपाल में विधिवत मंदिर व कोर्ट में शादी की थी।
कमलेश ने कहा कि उनके संबंधों और शादी की जानकारी श्री वाजपेयी की पत्नी कुसुम और ससुरालीजनोंे को थी। कमलेश ने श्री वाजपेयी से किसी प्रकार से ब्लैकमेल करने से इनकार किया और कहा कि वे मुझसे बहुत प्यार करते थे और मैं व मेरे बच्चे उन्हें प्रिय थे। मैं भी उन्हें प्यार करती थीं, फिर ब्लैकमेलिंग अथवा पैसे की बात बीच में आ ही नहीं सकती थी।
कमलेश ने कहा कि वर्ष 2004 में जब मैं बीमार हो गई थी, तब श्री वाजपेयी ही मुझे नासिक और मुम्बई ले गए जहां मेरा इलाज कराया। उनके नाम के टिकट होने का दावा भी कमलेश ने किया और कहा कि श्री वाजपेयी और उनके प्यार की निशानी प्रियंका के रूप में उनके पास है। कमलेश ने खुलासा किया कि वे वर्ष 2003 में श्री वाजपेयी ने उनका गर्भपात भोपाल के आदर्श अस्पताल में कराया था।
इसके कागजात भी कमलेश ने अपने पास होने का दावा किया। कमलेश ने कहा कि वे मेरे और मेरे बच्चों के साथ ही रहना चाहते थे, पर यह उनकी पत्नी कुसुम और सालों को गंवारा नहीं था। कमलेश ने कहा कि वर्ष 2005 में जब जयदीप प्रसाद ग्वालियर एसपी और विनीत खन्ना सीएसपी थे, तब उनकी पत्नी कुसुम ने उनसे श्री वाजपेयी और मेरी शिकायत की थी।
कमलेश ने आरोप लगाया कि कुसुम उन्हें और श्री वाजपेयी को अक्सर धमकियां दिया करती थी। 25-26 दिसंबर 07 को भी फोन पर कुसुम ने धमकी दी। इसका रिकार्ड मेरे पास मौजूद है। कमलेश ने कहा कि उनकी पहली शादी करीब 22 साल पूर्व हुई थी, जो कि तीन साल में ही टूट गई। इसके कई साल बाद वे श्री वाजपेयी के संपर्क में आई।
कमलेश ने कहा कि श्री वाजपेयी नौकरी व जायदाद में मेरे व मेरे बच्चों के नोमीनेशन के लिए रजिस्टर्ड पत्र लिखकर छोड़ गए हैं। कमलेश ने कहा कि वाजपेयी साहब ऐसे अधिकारी नहीं थे, जो कि खुदकुशी कर लें, बल्कि उन्हें षड़यंत्रपूर्वक मारा गया है। इसकी सीआईडी जांच होना चाहिए और यदि इसमें न्याय नहीं मिला तो मैं आगे जाऊंगी।
कमलेश ने सुसाइड नोट पर भी सवाल खड़े किए और कहा कि जो व्यक्ति मुझसे इतना प्यार करता हो, वो मेरे बारे में ऐसे कैसे लिख सकता है। कमलेश ने सवाल किया कि मालनपुर रेस्ट हाउस में जब वे बेहोशी की हालत में मिले थे, तब सुसाइड नोट क्यों नहीं मिला। जो कि दिल्ली के अस्पताल में उनकी पत्नी एवं बच्चों को मिला।
कमलेश ने इस पूरे मामले को षड़यंत्र निरूपित किया है। साथ ही इस बात से भी इनकार किया कि श्री वाजपेयी ने आत्महत्या की। सुसाइड नोट में दिए गए अफसरों के नामों का भी कमलेश ने जिक्र नहीं किया और कहा कि मुझे उनके बारे में कोई जानकारी नहीं है। फिलहाल भोपाल में पदस्थ प्रधान आरक्षक कमलेश मेडिकल लीव पर है।