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तलाश एक चिंपांजी की

ग्वालियर. chimpan एक अदद चिंपांजी की तलाश है नगर निगम के गांधी प्राणी उद्यान यानी चिड़िया घर को । वन्य जीवों के प्रति बच्चों को आकर्षित करने व उनके मनोरंजन के उद्देश्य से स्थापित किए चिड़ियाघर में एक चिंपांजी की जरूरत लम्बे अर्से से महसूस की जा रही है। हालात यह हैं कि पिछले कई वषरे से चिंपांजी व हाथी जैसे जानवर न होने से यहां आने वाले सैलानियों की संख्या लगातार घटती जा रही है।

नगर निगम के गांधी प्राणी उद्यान में वन्य जीवों की भरमार है, परन्तु फिर भी यहां आने वाले सैलानियों की संख्या लगातार घट रही है। इसके पीछे लोगों का विशेष मनोरंजन करने वाले चिंपांजी और हाथी क ा अब यहां न होना है। हाथी के लिए तो सेन्ट्रल जू अथोरिटी ऑफ इंडिया का नियमों के अनुसार आवश्यक जगह का अभाव आड़े आ रहा है, जबकि चिंपाजी तमाम प्रयासों के बावजूद भी यहां नहीं लाया जा सका है।

बताया जाता है कि सीजेडए से अनुबंिधत कुल 151 चिड़ियाघरों में से केवल 6 चिड़ियाघरों में ही चिंपांजी है इनमें दिल्ली के अलावा उड़ीसा का नन्दन कानन, चेन्नई का अरिगनार अन्ना व मैसूर का जूलॉजीकल पार्क शामिल है। सीजेडए के नियमों के अनुसार यदि किसी चिड़ियाघर में वन्य जीव की आवश्यकता महसूस होती है तो वह देश के सभी चिड़ियाघरों को पत्र लिखकर अपनी आवश्यकता बताता है, व साथ में उन वन्य जीवों की सूची भी देता है जिन्हें बदले में कोई जानवार देने के लिए वह तैयार है।

नगर निगम से मिली जानकारी के अनुसार यहां चिड़ियाघर में चिंकारा, ब्लैकवक , बोनटबंदर, बजरीगर, अजगर, कोबरा, मदर घड़ियाल ऐसे जीव है जिन्हें वह दूसरे चिड़ियाघरों को देने के लिए तैयार है, इसके बावजूद चिंपांजी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।

राजा के बाद कोई नहीं
नगर निगम के गांधी प्राणी उद्यान में 1989-90 तक चिंपांजी ने यहां आने वाले सैलानियों विशेषकर बच्चों का खूब मनोरंजन किया था। तब यहां राजा नाम के चिंपाजी की सल्तनत थी। राजा के देहांत के बाद काफी प्रयास किए गए परन्तु यहां चिंपाजी नहीं आ सका।

तस्करी ने बढ़ाई परेशानी
भारत में लगभग विलुप्त होते जा रहे चिंपांजी को विदेश से लाने के प्रयास को उस समय झटका लगा जब अंतराष्ट्रीय स्तर पर इसकी तस्करी की बात उजागर हुई। ऑरंगोटन प्रजाति के चिंपाजी अफ्रीका और युगांडा में बहुतायत पाये जाते है। अधिकांश देशों में इन्हें यहीं से आयात किया गयाहै। अंतराष्ट्रीय बाजार में जब इनकी ऊंची कीमत मिलने लगी तब तस्करी भी बढ़ गई जिसके चलते अब इन पर प्रतिबंध लगा दिया गया।

युगल जोड़ों का ही सहारा
सैलानियों की गिरती संख्या के कारण चिड़ियाघर को आय के लिए केवल युगल जोड़ों का ही सहारा है। लोगों की नजरों से बचकर यहां समय बिताने आने वाले युगल जोड़ों से ही आधे से अधिक आय होती है।

कर्नाटक से मिली हाथी की स्वीकृति
चिंपांजी और हाथी की तलाश में जुटे नगर निगम को हाथी की स्वीकृति कर्नाटक से मिल गई है। कर्नाटक के पार्षदों के भ्रमण दल ने जब वहां चिड़ियाघर में अतिरिक्त हाथी देखा, तब उसे ग्वालियर के चिड़ियाघर में ले जाने की इच्छा जताई थी, जिस पर कर्नाटक नगर निगम तैयार भी हो गया था। वर्तमान में ग्वालियर नगर निगम के चिड़ियाघर में पर्याप्त जगह नहीं है। नए मास्टर प्लान के अनुसार जब ये जगह बढ़ाई जाएगी, तब वहां हाथी लाया जा सकता है।





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