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नहीं निकला जजों की बहाली का हल

लंदन.अंतिम समय पर अमेरिका के हस्तक्षेप के बावजूद पाकिस्तान की साझा सरकार के आला नेता जजों की समस्या का हल नहीं निकाल पाए हैं। माना जा रहा है कि इसी मुद्दे पर नवाज शरीफ की पार्टी मुस्लिम लीग के नेता आज कैबिनेट से अपना नाम वापस ले सकते हैं।

ग़ौरतलब है कि दुबई में पीपीपी नेता आसिफ़ अली ज़रदारी और नवाज़ शरीफ़ के बीच हुई बातचीत में जजों की बहाली के लिए 12 मई की समयसीमा निर्धारित की गई थी।

जानकारों का कहना है कि इस मुद्दे के न सुलझने से गठबंधन सरकार पर संकट आ सकता है।

मुस्लिम लीग के प्रमुख नवाज़ शरीफ ने इस बारे में हुए कहा कि हमारी कोशिश होगी कि गठबंधन न टूटे, इसके नुक़सान से हम वाकिफ़ हैं लेकिन जजों को बहाल न करने से होनेवाला नुक़सान कहीं ज्यादा बड़ा है। उल्लेखनीय है कि शरीफ जजों की बहाली पर अड़े हुए हैं।

नवाज़ शरीफ़ का कहना था कि यदि हम बाक़ी मुद्दों पर तो आगे बढ़ते हैं और इसको छोड़ देते हैं तो जनता में एक बैचेनी रहेगी। गौरतलब है कि पाकिस्तान में गठबंधन सरकार के गठन के दौरान तय हुआ था कि राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने जिन जजों को बर्ख़ास्त किया था, उनको अप्रैल के अंत तक बहाल कर दिया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने नवंबर, 2007 में लगभग 60 जजों को निलंबित कर दिया था। इसमें मुख्य न्यायाधीश इफ़्तिख़ार चौधरी भी शामिल हैं।





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