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घी में घालमेल

अजमेर. सरस मार्का का नकली देसी घी बनाने वाला गिरोह करीब छह महीने से ग्रामीण इलाके में सौ से ज्यादा नकली घी के पीपे खपा चुका है। असली घी के एक पीपे से तीन पीपे तैयार कर यह लोग काली कमाई कर रहे थे।

पुलिस गिरफ्त में फंसे दो अभियुक्तों की निशानदेही पर नकली घी बनाने की सामग्री और सरस घी के मार्का और सील बरामद की गई है। माल परिवहन करने में प्रयुक्त वैन भी पुलिस ने जब्त कर ली है। अभियुक्तों को अदालत के आदेश से दो दिन रिमांड पर लिया गया।

पुलिस की स्पेशल टीम के प्रभारी सीआई प्रमोद स्वामी ने बताया कि आरोपी दूदू निवासी सुल्तान मीणा पुत्र लक्ष्मीनारायण और रामेश्वर पुत्र मदनलाल मदनगंज इलाके में हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी के एक मकान में करीब छह महीने से नकली घी बना थे। इनकी निशानदेही पर काली डूंगरी हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी से नकली घी के सात पीपे, तीन पीपे वनस्पति घी और अन्य सामग्री बरामद की गई।

पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे सरस ब्रांड घी के खाली पीपे हलवाइयों से खरीदते थे। सीआई प्रमोद स्वामी ने बताया कि आरोपी सुल्तान मीणा काले कारोबार का मास्टर माइंड है। उसने जयपुर में नकली घी बनाना सीखा था। रामेश्वर की वैन में वह नकली घी सप्लाई करता था। रविवार को दोनों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें दो दिन के रिमांड पर लिया गया।

बोगस ग्राहक बनकर पकड़ा
पुलिस ने नकली घी बनाकर बेचने वाले लोगों को बोगस ग्राहक बनकर पकड़ा था। एसआई ज्ञानेश्वर ने बताया कि अभियुक्तों के मोबाइल फोन पर घी के पीपे खरीदने की सौदेबाजी की गई थी। फिर सुल्तान और रामेश्वर को घी के पीपे लेकर नारेली बुलाया गया। अजमेर डेयरी के विशेषज्ञ से पीपे की सील की जांच कराई गई।

डेढ़ से दो हजार में
अभियुक्तों ने खुलासा किया है कि वे देसी घी के एक पीपे से तीन पीपे तैयार करते थे। एक पीपा डेढ़ से दो हजार रुपए में बेचते थे, नकली घी बनाने के लिए डालडा, वनस्पति तेल, दही और अन्य कैमिकल मिलाया जाता था।





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