अजमेर.
नला बाजार की मिट्ठनलाल का चौक वाली गली में रविवार सुबह कथित रूप से बंदरों की उछलकूद से जर्जर इमारत का एक हिस्सा भरभरा कर ढह गया।
हादसे में वृद्धा की मौत हो गई, जबकि उसकी बेटी और नवासा बुरी तरह जख्मी हो गए।
आसपास रहने वाले लोग घबराकर मकानों से बाहर निकल आए। इलाके में अफरा-तफरी मच गई। घायलों को जेएलएन अस्पताल में भर्ती कराया गया है। क्षेत्रवासियों ने प्रशासन पर बचाव कार्य में लेटलतीफी का आरोप लगाया है। मिट्ठनलाल के चौक में करीब पचास साल पुरानी इमारत की छत रविवार सुबह गिर गई।
इमारत की दूसरी मंजिल पर रहनेवाली औजी बाई (75) की मौके पर ही मौत हो गई। औजी बाई की बेटी कमलेश और नवासा अश्वनी घायल हो गए। लोगों ने अश्वनी और कमलेश को मलबे से बाहर निकाला, लेकिन औजी बाई पट्टी और मलबे में दब गई थी। पुलिस की मदद से करीब आधे घंटे की मशक्कत के बाद उसे निकाला जा सका।
अस्पताल में अश्विनी ने बताया कि मकान की दूसरी मंजिल पर वह परिवार के साथ कमरे में नाश्ता कर रहा था। छत पर रोजाना की तरह 10-15 बंदर उछलकूद कर रहे थे। अचानक छत का पटाव टूट पड़ा। पटाव और मलबे से मकान की दूसरी और पहली मंजिल की छत गिर गई। कमरे में मौजूद औजी बाई, कमलेश और अश्वनी मलबे के साथ पहली मंजिल पर आ गिरे।
ग्रांउड फ्लोर के कमरे में रहने वाली शांतिदेवी हादसे के समय मकान के बाहर थी। वह बच गई, लेकिन उसका कमरा भी ढह गया। इमारत के दूसरे हिस्से में रहने वाली लक्ष्मी पत्नी भीमनदास ने बाहर आकर लोगों को मदद के लिए आवाज लगाई।
कुछ लोगों ने इमारत में जाकर घायल अश्वनी और उसकी मां कमलेश को बाहर निकाला। बाद में कोतवाली पुलिस और दमकल कर्मियों ने औजी बाई का शव मलबे से निकाला। उसके सिर पर पटाव गिरने से गंभीर चोट लगी थी।
पानी से हुई थी नींव कमजोर
श्रीनगर गांव में रविवार दोपहर मकान ढहने से एक वृद्धा की मौत हो गई। हादसे के समय परिवार के अन्य सदस्य मकान से बाहर थे। पानी भरने के कारण मकान की नींव कमजोर हो गई थी। ग्रामीणों के मुताबिक रविवार को मकान अचानक भरभरा कर गिर गया और तौफी पत्नी बुद्धासिंह मलबे में दबने से गंभीर रूप से घायल हो गई।
परिवारजन ने उसे स्थानीय अस्पताल पहुंचाया। जहां से उसे जेएलएन अस्पताल रेफर कर दिया गया, मगर रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया।मृतका के रिश्तेदार शैतानसिंह रावत ने बताया कि मकान की नींव में पानी भरा था, जिससे दीवारें कमजोर हो गई थीं। पूरी तरह झुक चुकी एक दीवार काफी समय से गिरने के कगार पर थी।